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चिंताजनक: 'कैंसर पता चलने के बाद 5 में 3 मरीजों की समय से पहले मौत', आईसीएमआर के अध्ययन में खुलासा
Tue, 25 Feb 2025 05:14 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 25 Feb 2025 05:14 AM IST
सार
इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र टोपरानी के मुताबिक, देर से निदान, उपचार तक पहुंचने में कठिनाई जैसे कई कारक इसके पीछे हैं। भारत में कैंसर से समय से पहले होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या साल 2000 में 4.9 लाख से 87 फीसदी बढ़कर 2022 में 9.17 लाख तक पहुंची है।
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कैंसर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत में हर पांच में से तीन मरीजों को कैंसर का पता चलने के बाद समय से पहले मौत का सामना करना पड़ रहा है। यह खुलासा नई दिल्ली स्थित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन रिपोर्ट में किया है, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिका द लांसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित किया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि लिंग और उम्र के आधार पर कैंसर के रुझान को लेकर यह पहला ऐसा व्यापक विश्लेषण है, जिसमें कैंसर मरीजों की समय से पहले मृत्यु दर 64.8 फीसदी तक होने का पता चला है। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी नामक रिपोर्ट के अनुमानों का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने यह पाया कि भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतें खतरनाक रूप से तेज बढ़ रही हैं जो प्रति वर्ष 1.2 से चार फीसदी के बीच है। इसके लिए भारत में उच्च कैंसर मृत्यु दर के लिए कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं, जिनमें देर से निदान और समय पर उचित उपचार तक पहुंचने की चुनौतियां शामिल हैं।
देर से निदान, उपचार तक पहुंचने में कठिनाई बड़ी वजह
इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र टोपरानी के मुताबिक, देर से निदान, उपचार तक पहुंचने में कठिनाई जैसे कई कारक इसके पीछे हैं। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर से समय से पहले होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या साल 2000 में 4.9 लाख से 87 फीसदी बढ़कर 2022 में 9.17 लाख तक पहुंची है।
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महिलाओं में स्तन तो पुरुषों में मुख कैंसर ज्यादा
वैज्ञानिकों ने अध्ययन में बताया कि भारतीय महिलाएं स्तन कैंसर से सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। यह महिलाओं में होने वाले कैंसर के सभी नए मामलों में 13.8 फीसदी का योगदान दे रहा है। इसके बाद मुख (10.3 फीसदी), ग्रीवा (9.2 फीसदी), श्वसन (5.8 फीसदी), इसोफेजियल (5 फीसदी) और कोलोरेक्टल (5 फीसदी) का स्थान आता है।
इसी तरह पुरुषों में मुख कैंसर सबसे अधिक प्रचलित है, जो सभी नए मामलों में 15.6 फीसदी है। इसके बाद श्वसन (8.5 फीसदी), ग्रासनली (6.6 फीसदी) और कोलोरेक्टल (6.3 फीसदी) का स्थान आता है। अध्ययन में फेफड़े, ब्रांकाई और श्वास नली के कैंसर को श्वसन कैंसर के रूप में वर्गीकृत किया है। श्वसन और अन्नप्रणाली के कैंसर में प्रति 100 नए निदानों में लगभग 93 की मृत्यु दर असाधारण रूप से उच्च रही है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि लिंग और उम्र के आधार पर कैंसर के रुझान को लेकर यह पहला ऐसा व्यापक विश्लेषण है, जिसमें कैंसर मरीजों की समय से पहले मृत्यु दर 64.8 फीसदी तक होने का पता चला है। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी नामक रिपोर्ट के अनुमानों का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने यह पाया कि भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतें खतरनाक रूप से तेज बढ़ रही हैं जो प्रति वर्ष 1.2 से चार फीसदी के बीच है। इसके लिए भारत में उच्च कैंसर मृत्यु दर के लिए कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं, जिनमें देर से निदान और समय पर उचित उपचार तक पहुंचने की चुनौतियां शामिल हैं।
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देर से निदान, उपचार तक पहुंचने में कठिनाई बड़ी वजह
इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र टोपरानी के मुताबिक, देर से निदान, उपचार तक पहुंचने में कठिनाई जैसे कई कारक इसके पीछे हैं। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर से समय से पहले होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या साल 2000 में 4.9 लाख से 87 फीसदी बढ़कर 2022 में 9.17 लाख तक पहुंची है।
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महिलाओं में स्तन तो पुरुषों में मुख कैंसर ज्यादा
वैज्ञानिकों ने अध्ययन में बताया कि भारतीय महिलाएं स्तन कैंसर से सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। यह महिलाओं में होने वाले कैंसर के सभी नए मामलों में 13.8 फीसदी का योगदान दे रहा है। इसके बाद मुख (10.3 फीसदी), ग्रीवा (9.2 फीसदी), श्वसन (5.8 फीसदी), इसोफेजियल (5 फीसदी) और कोलोरेक्टल (5 फीसदी) का स्थान आता है।
इसी तरह पुरुषों में मुख कैंसर सबसे अधिक प्रचलित है, जो सभी नए मामलों में 15.6 फीसदी है। इसके बाद श्वसन (8.5 फीसदी), ग्रासनली (6.6 फीसदी) और कोलोरेक्टल (6.3 फीसदी) का स्थान आता है। अध्ययन में फेफड़े, ब्रांकाई और श्वास नली के कैंसर को श्वसन कैंसर के रूप में वर्गीकृत किया है। श्वसन और अन्नप्रणाली के कैंसर में प्रति 100 नए निदानों में लगभग 93 की मृत्यु दर असाधारण रूप से उच्च रही है।