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चिंताजनक: देश के 2764 बाल गृहों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार रोकने को नहीं हैं पर्याप्त उपाय
Mon, 16 Nov 2020 07:39 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 16 Nov 2020 07:39 PM IST
सार
- केंद्र सरकार की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई जानकारी
- देश के 7163 बाल गृहों में से 2764 में है पर्याप्त उपायों का अभाव
- 1504 बाल गृहों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा भी मौजूद नहीं
- 434 बाल गृहों में शौचालय और स्नानागार में निजता का ध्यान नहीं
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
देश के 2764 बाल गृह संस्थानों में बच्चों को शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार से बचाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं हैं, जिससे बच्चों को गहरे आघात की समस्या से गुजरना पड़ता है। यह जानकारी केंद्र सरकार की ओर से जारी सोशल ऑडिट रिपोर्ट में दी गई है। यह संख्या देश के कुल बाल गृहों की करीब 40 फीसदी है।
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देश के सभी बाल गृहों के लिए सोशल ऑडिट का आदेश साल 2018 में जारी किया गया था जब उत्तर प्रदेश के देवरिया और बिहार के मुजफ्फरपुर से लड़कियों के यौन उत्पीड़न की खबरें सामने आई थीं। यह सोशल ऑडिट देश भर के 7163 बाल गृह संस्थानों में कराया गया था, जिनमें 2.56 लाख बच्चे रहते हैं।
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इसमें पता चला कि 2764 संस्थान ऐसे हैं जिनमें बच्चों को किसी प्रकार से शारीरिक या मानसिक दुर्व्यवहार से बचाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यों की बात करें तो अंडमान निकोबार में 93.8 फीसदी, त्रिपुरा में 86.8 फीसदी और कर्नाटक में 74.2 फीसदी बाल गृहों में इस तरह के मानकों का अभाव है।
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1504 बाल गृहों में शौचालय का अभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, 1504 बाल गृहों में शौचालय की सुविधा का अभाव है, वहीं 434 में शौचालय और स्नानगृह में निजता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे उपायों का अभाव वहां रहने वाले बच्चों के शारीरिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार का कारण बन सकता है।
2039 बाल गृहों का पंजीकरण ही नहीं
रिपोर्ट के अनुसार 373 बाल गृह ऐसे हैं जहां किसी व्यक्ति के लिए प्रावधान, सफाई, मौसम और आयु के अनुरूप कपड़ों आदि का अभाव है। वहीं, 1069 बाल गृहों में बच्चों के लिए अलग से पलंग की व्यवस्था भी नहीं है। इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि 2039 यानी 28.5 फीसदी बाल गृह अभी तक पंजीकृत भी नहीं हैं।