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EPFO: 27 करोड़ कर्मियों को लाभ, अब 'रंग' बताएगा कि क्लेम सेटलमेंट के लिए चेक-बैंक पासबुक अपलोड करनी है या नहीं

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 29 May 2024 05:18 PM IST
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सार
'ईज ऑफ लिविंग' यानी जीवनयापन में आसानी" को सुगम बनाने के लिए ऑटो क्लेम समाधान अब ईपीएफ योजना, 1952 के अनुच्छेद 68के (शिक्षा और विवाह के उद्देश्य) और 68बी (आवास के उद्देश्य) के तहत सभी दावों के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, इसकी सीमा को 50,000 रुपये से बढ़ा कर दोगुना 1,00,000 रुपये कर दिया गया है।
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27 crore will benefit now Rang will tell check-bank passbook has to be uploaded for claim settlement or not
EPFO - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 27 करोड़ से ज्यादा कर्मियों को राहत प्रदान की है। अभी कुछ दिन पहले ही ईपीएफओ ने ऑटो क्लेम सुविधा का दायरा बढ़ा दिया था। अब क्लेम सेटलमेंट को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। मौजूदा समय में योग्य कर्मचारियों को अपना क्लेम सेटलमेंट कराने के लिए चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अनिवार्य तौर पर अपलोड करना पड़ता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा 28 मई को जारी आदेशों में कहा गया है कि अन्य सभी नियम पूरे करने वाले केसों में अब क्लेम सेटलमेंट कराने की प्रक्रिया के दौरान चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अनिवार्य तौर पर अपलोड करने से छूट प्रदान की गई है। खास बात है कि क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया के दौरान ईपीएफओ कार्यालय के 'बाबू' को वेबसाइट के रंग से यह पता चल जाएगा कि इस केस में चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अपलोड करना, अनिवार्य है या नहीं है। हालांकि शुरू में यह बात संबंधित 'बाबू' को ही ध्यान में रखनी पड़ेगी, यानी मैनुअल तरीके से फाइल जांचनी होगी।



ऑनलाइन बैंक केवाईसी का रखना होगा ध्यान
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के खाता धारकों को क्लेम सेटलमेंट कराने के लिए एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना होता है। पिछले कई वर्षों से 'कर्मचारी भविष्य निधि संगठन' इस बात के लिए प्रयासरत है कि क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। खाता धारकों को क्लेम सेटलमेंट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मियों को जब अपना क्लेम सेटलमेंट कराना होता है, तो उसके लिए बैंक का कैंसिल चेक या पासबुक अपलोड करनी पड़ती है। अब इस प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इस मामले में संबंधित संस्थान को ऑनलाइन बैंक केवाईसी आदि बातों का ध्यान रखना होगा।


कुछ समय बाद कलर कोडिंग शुरू होगी
क्लेम सेटलमेंट के मामलों में बैंक केवाईसी ऑनलाइन होगा। उस पर संबंधित संस्थान के प्राधिकृत व्यक्ति के डिजिटल सिग्नेचर होंगे। ऐसे केस में कर्मचारी को चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। 'कर्मचारी भविष्य निधि संगठन' ने इस बाबत अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को सूचित कर दिया है। ईपीएफओ ने ईमेल के द्वारा सभी जोन कार्यालयों को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नए सॉफ्टवेयर के तहत अब संबंधित बाबू के पास एक मैसेज आएगा कि फलां केस को बैंक ने वेरिफाई कर दिया है। यह क्लेम प्रोसेस करने लायक है या नहीं है। उसी दौरान यह मैसेज भी मिलेगा कि इस केस में चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अपलोड करने की जरुरत है या नहीं है। अब नई प्रक्रिया के द्वारा क्लेम सेटलमेंट की फाइल केवल इस वजह से रिजेक्ट नहीं होगी कि उसमें चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अपलोड नहीं किया गया है। कुछ समय बाद वेबसाइट पर जब क्लेम सेटलमेंट प्रकिया शुरु होगी, तो उसमें एक अलग कलर नजर आएगा। वह रंग देखकर संबंधित बाबू यह समझ जाएगा कि इस केस में चेक बुक या बैंक पासबुक का फोटो अपलोड करने की जरूरत नहीं है या नहीं है। जब तक कलर कोडिंग नहीं होती, तब तक संबंधित बाबू इस बात का ध्यान रखेगा कि इस केस में चेक या बैंक पासबुक का फोटो लगाना अनिवार्य है या नहीं।

ऑटो-मोड निपटान की सुविधा का विस्तार
पिछले दिनों ईपीएफओ की ऑटो-मोड निपटान की सुविधा में बदलाव किए गए थे। पहले बीमारी के लिए अग्रिम राशि के मामलों में ही ऑटो क्लेम सॉल्यूशन प्रदान किया गया था। लोगों को इसका फायदा भी मिल रहा था। उदाहरण के लिए, ईपीएफओ सदस्य अनिरुद्ध प्रसाद ने 9 मई को अनुच्छेद 68जे के तहत बीमारी के लिए अग्रिम राशि लेने का आवेदन किया था। उनके अग्रिम राशि के दावे का निपटान महज तीन दिन के भीतर हो गया। 11 मई को 92,143 रुपये की राशि का निपटान कर दिया गया। ईपीएफओ ने अपने करोड़ों सदस्यों के जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए अब शिक्षा, विवाह और आवास के उद्देश्यों के लिए अग्रिम राशि के दावों का ऑटो-मोड से निपटान शुरू किया है। ईपीएफओ ने जो स्वत: दावा समाधान या ऑटो क्लेम सॉल्यूशन शुरू किया है, उसके तहत दावे को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के आईटी सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से संसाधित या प्रोसेस किया जाता है।

दावा निपटान का ऑटो मोड अप्रैल, 2020 में बीमारी के लिए अग्रिम राशि के उद्देश्य से शुरू किया गया था। अब इसकी सीमा बढ़ाकर 1,00,000 रुपये तक कर दी गई है। चालू वर्ष के दौरान, लगभग 2.25 करोड़ सदस्यों को इस सुविधा का लाभ मिलने की आशा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान, ईपीएफओ ने लगभग 4.45 करोड़ दावों का निपटारा किया, जिनमें से 60 फीसदी से अधिक (2.84 करोड़) दावे अग्रिम दावे थे। वर्ष के दौरान निपटाए गए कुल अग्रिम दावों में से, लगभग 89.52 लाख दावों का निपटान ऑटो-मोड का उपयोग करके किया गया।

करोड़ों सदस्यों को लाभ पहुंचने की उम्मीद
'ईज ऑफ लिविंग' यानी जीवनयापन में आसानी" को सुगम बनाने के लिए ऑटो क्लेम समाधान अब ईपीएफ योजना, 1952 के अनुच्छेद 68के (शिक्षा और विवाह के उद्देश्य) और 68बी (आवास के उद्देश्य) के तहत सभी दावों के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, इसकी सीमा को 50,000 रुपये से बढ़ा कर दोगुना 1,00,000 रुपये कर दिया गया है। इस कदम से ईपीएफओ के करोड़ों सदस्यों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है। स्वत:-निपटान या ऑटो-सेटलमेंट के तहत पूरी प्रक्रिया मानवीय हस्तक्षेप के बिना आईटी प्रणाली द्वारा संचालित है। केवाईसी, पात्रता और बैंक सत्यापन के साथ कोई भी दावा आईटी टूल द्वारा स्वचालित रूप से भुगतान के लिए संसाधित या प्रोसेस किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप, ऐसे अग्रिमों के लिए दावा निपटान की अवधि 10 दिन से घटकर 3-4 दिन के भीतर रह जाती है। सिस्टम द्वारा विधिमान्य नहीं होने वाले दावों को लौटाया या अस्वीकार नहीं किया जाता। इसके बाद उन्हें दूसरे स्तर की जांच और अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। ऑटो दावों के दायरे का विस्तार आवास, विवाह और शिक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ उसमें वृद्धि से सीधे तौर पर अनेक सदस्यों को कम से कम संभावित अवधि के भीतर अपने धन का लाभ उठाने में मदद मिलेगी, जिससे उन्हें अपनी शिक्षा, विवाह, या आवास संबंधी आवश्यकताएं तत्काल पूरी करने में पर्याप्त सहायता मिलेगी। इसे 6 मई 2024 को पूरे भारत में शुरू किया गया और तब से ईपीएफओ ने त्वरित सेवा प्रदान करने वाली इस पहल के माध्यम से 45.95 करोड़ रुपये के लिए 13,011 मामलों को मंजूरी दी है।

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