चिंताजनक: देश में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 24,700 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं, नाइजीरिया में स्थिति सबसे भयावह
द लैंसेट में प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर प्रति लाख जीवित जन्म 24,700 है, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। स्वास्थ्य मैट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान (IHME) ने कहा कि सुधार धीमी और असमान है।
विस्तार
दुनियाभर में माताओं के स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे दावों के बीच एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। भारत में मातृ मृत्यु दर की स्थिति अब भी गंभीर है। 2023 में भारत में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 24,700 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं, जो दक्षिण एशियाई देशों में काफी अधिक है। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) 2023 के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आए हैं। स्वास्थ्य मैट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान (आईएचएमई) के शोधकर्ताओं की ओर से तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रगति के बावजूद सुधार की दर अब असमान और धीमी हो गई है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में यह आंकड़ा 10,300 रहा। नाइजीरिया में स्थिति सबसे भयावह (32,900) है। वैसे, 1990 की तुलना में वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु दर में एक तिहाई की गिरावट आई है, लेकिन दुनिया के 204 में से 104 देश अब भी सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के उस मानक को पूरा नहीं कर पाए हैं, जिसमें इस आंकड़े को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है।
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स्वास्थ्य प्रणालियों को तत्काल मजबूत करने की जरूरत
शोधकर्ताओं ने कहा कि 2030 के वैश्विक लक्ष्यों (एसडीजी) को पाने के लिए अब पांच साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और निगरानी बढ़ाने के लिए नए सिरे से वैश्विक कार्यवाही और निरंतर निवेश की तत्काल आवश्यकता है, ताकि मातृ मृत्यु दर में आ रही गिरावट की गति को तेज किया जा सके।
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मुख्य कारण और समाधान
विशेषज्ञों ने पाया कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप मौतों के सबसे बड़े कारण हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना महामारी ने टीकाकरण से पहले के दौर (2020-21) में इस संकट को और गहरा दिया था।
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