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मद्रास हाईकोर्ट: 21 वकीलों ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा पत्र, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश का किया विरोध

Thu, 02 Feb 2023 11:06 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई/ नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई/ नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 02 Feb 2023 11:06 PM IST
सार

मद्रास हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि एडवोकेट गौरी के प्रतिगामी विचार पूरी तरह से मूलभूत संवैधानिक मूल्यों के विपरीत हैं। उनके विचार गहरी धार्मिक कट्टरता को दर्शाते हैं। ऐसे में वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के अयोग्य हैं।
 

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21 Madras HC lawyers write to President Murmu opposing SC Collegium recommendation
मद्रास हाईकोर्ट

विस्तार

मद्रास हाई कोर्ट के कुछ बार अधिवक्ताओं ने एडवोकेट लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाई कोर्ट का जज बनाए जाने की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर नाराजगी जताई है। इस बाबत मद्रास हाईकोर्ट के 21 अधिवक्ताओं के एक समूह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। इसमें इन अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी को मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश वापस करने का आग्रह किया है। 

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क्या लिखा है पत्र में?
मद्रास हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि एडवोकेट गौरी के प्रतिगामी विचार पूरी तरह से मूलभूत संवैधानिक मूल्यों के विपरीत हैं। उनके विचार गहरी धार्मिक कट्टरता को दर्शाते हैं। ऐसे में वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के अयोग्य हैं।
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गौरतलब है कि एडवोकेट लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी खुद को ट्विटर पर 'भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव' बताती हैं। बीती 17 जनवरी को भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने न्यायिक नियुक्ति के लिए चार अन्य अधिवक्ताओं के साथ गौरी के नाम की सिफारिश की थी।
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25 सालों से भी ज्यादा समय से लंबित हैं चार लाख से ज्यादा मामले-कानून मंत्री
इससे पहले, गुरुवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि देश भर की विभिन्न अदालतों में चार लाख से अधिक मामले ऐसे हैं जो 25 वर्षों से भी अधिक समय से लंबित हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लंबित मामलों की कुल संख्या 4,01,099 है।

कानून मंत्री ने बताया कि 27 जनवरी 2023 तक एकीकृत वाद प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईसीएमआईएस) से मिले डाटा के अनुसार भारत के सुप्रीम कोर्ट में 25 वर्षों से अधिक समय तक लंबित मुकाबलों की संख्या 81 है। 30 जनवरी 2023 तक राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) पर उपलब्ध डाटा के अनुसार, उच्च न्यायालय और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में 25 वर्षों से अधिक समय तक लंबित मामलों की संख्या क्रमशः 1,24,810 और 2,76,208 है।

जवाब में कानून मंत्री ने यह भी बताया कि लंबित मामलों की समस्या एक बहुआयामी समस्या है। जो देश की जनसंख्या में वृद्धि और जनता में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ही साल दर साल बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त साल 2020 के दौरान आई कोविड-19 महामारी ने भी पिछले तीन सालों में लंबित मामलों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नति के लिए अनुशंसित 5 नामों को मिल सकती है सरकार की मंजूरी  
सरकार हाई कोर्ट के तीन मुख्य न्यायाधीशों और दो न्यायाधीशों के नामों को मंजूरी दे सकती है, जिनकी सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के लिए सिफारिश की गई है। सरकार द्वारा इन पांच नामों की नियुक्तियों को हरी झंडी दिए जाने की संभावना है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि पांचों के शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने के बाद वहां जजों की संख्या 32 हो जाएगी।


गौरतलब है कि बीते साल 13 दिसंबर को, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मिथल; न्यायमूर्ति संजय करोल, मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय; न्यायमूर्ति पी वी संजय कुमार, मुख्य न्यायाधीश, मणिपुर उच्च न्यायालय; पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह; और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के लिए सरकार से सिफारिश की थी।

 

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