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WHO Report on TB: देश में 2021 में दर्ज किए गए टीबी के 21.4 लाख नए मामले, पिछले साल की तुलना में 18% ज्यादा
Fri, 28 Oct 2022 09:45 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 28 Oct 2022 09:45 PM IST
सार
विश्व स्वास्थ्य संगठन 27 अक्टूबर को रिपोर्ट जारी की थी और और पाया कि दुनिया भर में टीबी के निदान, उपचार और बीमारी पर कोविड-19 महामारी का असर रहा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2021 में कुल 21.4 लाख टीबी के मामले नोटिफाई किए थे जो 2020 की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। देश भर में 22 करोड़ से अधिक लोगों ने इस बीमारी की जांच कराई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सरकार की पहल के तहत 40,000 से अधिक निक्षय मित्र पूरे देश में 10.45 लाख से अधिक टीबी रोगियों की मदद कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन 27 अक्टूबर को रिपोर्ट जारी की थी और और पाया कि दुनिया भर में टीबी के निदान, उपचार और बीमारी पर कोविड-19 महामारी का असर रहा।
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रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को दावा किया कि भारत ने अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा वर्ष 2021 के लिए भारत की टीबी के मामले 2015 के आधारभूत वर्ष की तुलना में प्रति 100,000 जनसंख्या पर 210 है, इसमें 18 प्रतिशत की गिरावट आई है जो वैश्विक औसत 11 फीसदी से 7 प्रतिशत बेहतर है। ये आंकड़े भारत को बीमारी की दर के मामले में भी 36वें स्थान पर रखते हैं।
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कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में टीबी कार्यक्रमों को प्रभावित किया है। भारत 2020 और 2021 में महत्वपूर्ण कदम उठाकर बीमारी को दूर करने में सक्षम था, जिसके कारण राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में 21.4 लाख से अधिक टीबी के मामले सामने आए और 18 प्रतिशत ज्यादा मामलों की सूचना दी गई। मंत्रालय ने कहा कि सफलता का श्रेय कार्यक्रम में वर्षों से लागू किए गए उपायों को दिया जा सकता है, जैसे कि सभी मामलों को सरकार को सूचित करने के लिए अनिवार्य अधिसूचना नीति।
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सरकार ने कहा कि घर-घर जाकर सक्रिय केस मरीजों की जांच के लिए अभियान चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई घर छूटे नहीं। इसका उद्देश्य समुदाय में बीमारी के संचरण को रोकने के लिए अधिक से अधिक मामलों का पता लगाना है, जिससे मामलों में गिरावट आई है। भारत ने मामलों का पता लगाने के प्रयासों को मजबूत करने के लिए नैदानिक क्षमता को भी बढ़ाया है। स्वदेशी रूप से विकसित आणविक निदान ने आज देश के हर हिस्से में निदान की पहुंच का विस्तार करने में मदद की है। बयान में कहा गया है कि भारत के पास देश भर में 4,760 से अधिक आणविक निदान मशीनें हैं, जो हर जिले में पहुंच रही हैं।