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2018 बैच के 20 आईएएस-आईपीएस अफसरों को वरीयता से मिलेगा कैडर
Sat, 18 May 2019 05:42 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sat, 18 May 2019 05:42 AM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2018 बैच के 20 आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को बड़ी राहते देते हुए उनकी प्राथमिकता केहिसाब से कैडर देने केलिए कहा है। शीर्ष अदालत ने यह साफ किया है कि यह आदेश एक अपवाद है और इसे नजीर नहीं समझा जाना चाहिए। ये 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारी वे हैं जिन्होंने अदालत या केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट(कैट) का दरवाजा खटखटाया था।
मालूम हो कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 बैच के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों केकैडर आवंटन को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने सरकार को पूरी कवायद फिर से करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट के इस आदेश को सरकार सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अवकाशकालीन पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट केआदेश में बदलाव करते हुए इन 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारी को उनकी कैडर प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए उन्हें जगह देने केलिए कहा है। इससे पहले सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2018 बैच केआईएएस-आईपीएस अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और अब उन्हें ज्वाइन करना है।
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इस पर पीठ ने कहा कि कैडर से संबंधित सर्कुलर अस्पष्ट है। इस सर्कुलर को और स्पष्ट होना चाहिए। आपको उदाहरण केजरिए इसे स्पष्ट करना चाहिए। जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इन 20 केअलावा सभी अभ्यर्थियों केलिए यह सर्कुलर स्पष्ट था।
मेहता ने नए कैडर सिस्टम का बचाव करते हुए कहा कि अगर सभी अपने मनमुताबिक कैडर चाहेंगे तो अखिल भारतीय सेवा का क्या मतलब रह जाएगा। उन्होंने कहा कि कैडर व्यवस्था केदेश को पांच जोन में बांटा गया है। 2018 बैच केआईएएस-आईपीएस अधिकारी का प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट केआदेश को खारिज कर दिया जाना चाहिए। लेकिन पीठ सॉलिसिटर जनरल की दलीलों से संतुष्ट नहीं थी। हालांकि पीठ ने सॉलिसिटर को इस मसले का समाधान निकालने के लिए उपाय सुझाने के लिए कहा।
भोजनावकाश केबाद सॉलिसिटर जनरल ने पीठ के समक्ष अपना प्रस्ताव रखा। सॉलिसिटर जनरल का यह प्रस्ताव सभी पक्षों के अलावा अदालत को भी पसंद आया। जिसके बाद पीठ ने हाईकोर्ट केआदेश में बदलाव करते हुए 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को उनकी प्राथमिकता केहिसाब से कैडर देने का निर्देश दिया। इसकेतहत संबंधित राज्यों में एक-एक सीट बढ़ाई जाएगी।
पीठ ने साफ किया कि यह व्यवस्था सिर्फ इन्हीं 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों तक सीमित रहेगी। इस तरह का फायदा और किसी को नहीं दिया जाएगा। साथ ही पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य अभ्यथियों को दिए गए कैडर में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।
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मालूम हो कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 बैच के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों केकैडर आवंटन को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने सरकार को पूरी कवायद फिर से करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट के इस आदेश को सरकार सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अवकाशकालीन पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट केआदेश में बदलाव करते हुए इन 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारी को उनकी कैडर प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए उन्हें जगह देने केलिए कहा है। इससे पहले सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2018 बैच केआईएएस-आईपीएस अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और अब उन्हें ज्वाइन करना है।
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इस पर पीठ ने कहा कि कैडर से संबंधित सर्कुलर अस्पष्ट है। इस सर्कुलर को और स्पष्ट होना चाहिए। आपको उदाहरण केजरिए इसे स्पष्ट करना चाहिए। जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इन 20 केअलावा सभी अभ्यर्थियों केलिए यह सर्कुलर स्पष्ट था।
मेहता ने नए कैडर सिस्टम का बचाव करते हुए कहा कि अगर सभी अपने मनमुताबिक कैडर चाहेंगे तो अखिल भारतीय सेवा का क्या मतलब रह जाएगा। उन्होंने कहा कि कैडर व्यवस्था केदेश को पांच जोन में बांटा गया है। 2018 बैच केआईएएस-आईपीएस अधिकारी का प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट केआदेश को खारिज कर दिया जाना चाहिए। लेकिन पीठ सॉलिसिटर जनरल की दलीलों से संतुष्ट नहीं थी। हालांकि पीठ ने सॉलिसिटर को इस मसले का समाधान निकालने के लिए उपाय सुझाने के लिए कहा।
भोजनावकाश केबाद सॉलिसिटर जनरल ने पीठ के समक्ष अपना प्रस्ताव रखा। सॉलिसिटर जनरल का यह प्रस्ताव सभी पक्षों के अलावा अदालत को भी पसंद आया। जिसके बाद पीठ ने हाईकोर्ट केआदेश में बदलाव करते हुए 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को उनकी प्राथमिकता केहिसाब से कैडर देने का निर्देश दिया। इसकेतहत संबंधित राज्यों में एक-एक सीट बढ़ाई जाएगी।
पीठ ने साफ किया कि यह व्यवस्था सिर्फ इन्हीं 20 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों तक सीमित रहेगी। इस तरह का फायदा और किसी को नहीं दिया जाएगा। साथ ही पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य अभ्यथियों को दिए गए कैडर में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।