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अमर उजाला विशेष: सीवेज में कोरोना के 108 म्यूटेंट वायरस मिले, चार ऐसे जो अब तक भारत में कभी नहीं मिले
Fri, 11 Jun 2021 05:57 AM IST
Amit Mandal
परीक्षित निर्भय नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 11 Jun 2021 05:57 AM IST
सार
- सीवेज से सैंपल लेकर म्यूटेशन का पता लगाने वाला देश पहला अध्ययन आया सामने
- अभी तक लखनऊ, हैदराबाद और धारावी में सीवर में कोरोना वायरस के मिलने की हुई है पुष्टि
- सीएसआईआर की नेशनल कैमिकल लेबोरेटरी में छह सैंपलों में मिले में 20 से 35 म्यूटेंट वायरस
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new Corona strain
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना वायरस अपशिष्ट के साथ सीवर में पहुंचने के अब तक देश-विदेश में काफी प्रमाण सामने आ चुके हैं। हैदराबाद, मुंबई के धारावी और हाल ही में लखनऊ में इसके सबूत मिल चुके हैं लेकिन सीवर में वायरस के कितने स्वरूप हैं? इसका अध्ययन देश में पहली बार किया गया जिसके परिणाम हैरान कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के पुणे में सीवर ड्रेन में वैज्ञानिकों को वायरस के 108 म्यूटेशन मिले हैं। अभी तक देश में जीनोम सीक्वेसिंग के आधार पर भी इतने म्यूटेशन की पहचान नहीं हो पाई है। जबकि पुणे स्थित सीएसआईआर की नेशनल कैमिकल लेबोरेटरी में जब छह अलग-अलग सैंपल की जांच की गई तो किसी में 20 तो किसी में 35 म्यूटेशन तक पाए गए। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को सीवर में डेल्टा और अल्फा वैरिएंट भी मिला है। वहीं दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अमेरिका में मिले अलग-अलग वैरिएंट भी यहां पाए गए हैं।
पुणे स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक सूक्ष्मजीव संग्रह (एनसीआईएम), गाजियाबाद स्थित वैज्ञानिक और अभिनव अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर), इकोसन सर्विसेज फाउंडेशन (ईएसएफ) और सीएसआईआर-नेशनल कैमिकल लेबोरेटरी ने मिलकर यह अध्ययन किया है जिसे मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित किया गया।
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अध्ययन के जरिये प्रारंभिक चेतावनी
एनसीआईएम के डॉ. महेश धरने ने बताया कि हमने खुले अपशिष्ट को लेकर यह अध्ययन किया जिसमें नालियों से सैंपल लेकर वायरस की जांच की गई। साथ ही उनके म्यूटेशन के बारे में भी पता किया गया। दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक किए इस अध्ययन में 108 म्यूटेशन पाए गए। वहीं छह नमूनों में 35 प्रकार के वायरस देखने को मिले हैं। उन्होंने अध्ययन में बताया है कि भारत में यह पहला अध्ययन है जिसने अपशिष्ट जल के जरिए म्यूटेशन का पता लगाया है। साथ ही एक प्रारंभिक चेतावनी भी इससे मिल रही है।
देश में कभी नहीं मिले ऐसे वैरिएंट, सीवर में मिले
वैज्ञानिकों ने चार ऐसे म्यूटेशन का भी पता लगाया है जिनका भारत में अभी तक एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। जबकि अन्य देशों में यह म्यूटेशन जरूर मिला है। डॉ.महेश धरने ने कहा कि चार वैरिएंट ऐसे भी मिले हैं जिनकी आज तक भारत में पहचान ही नहीं हुई है। इनकी पहचान एस:एन 801, एस:सी480आर, एनएसपी14:सी279एफ और एनएसपी3:एल550डीईएल के रूप में की है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सीवर में वायरस की मौजूदगी के अब तक काफी अध्ययन सामने आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ देशों ने सीवर के जरिये भी म्यूटेशन का पता लगाया है लेकिन भारत में अभी तक ऐसा अध्ययन नहीं हुआ है। इस पर और भी अध्ययन होने चाहिए ताकि हमें ज्यादा से ज्यादा म्यूटेशन और उनके असर का पता चल सके। - डॉ. दिव्येंदु वर्मा, जन स्वास्थ्य शोद्यार्थी
.
अगर आप मुझसे पिछले साल म्यूटेशन के बारे में पूछते तो शायद मैं बहुत जानकारी नहीं दे सकता था लेकिन हां अब यह कहा जा सकता है कि भारत में नए म्यूटेशन की भरमार है और ऐसे अध्ययन उसके संकेत दे रहे हैं। - डॉ. रिजो एम जॉन, स्वास्थ्य विशेषज्ञ
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महाराष्ट्र के पुणे में सीवर ड्रेन में वैज्ञानिकों को वायरस के 108 म्यूटेशन मिले हैं। अभी तक देश में जीनोम सीक्वेसिंग के आधार पर भी इतने म्यूटेशन की पहचान नहीं हो पाई है। जबकि पुणे स्थित सीएसआईआर की नेशनल कैमिकल लेबोरेटरी में जब छह अलग-अलग सैंपल की जांच की गई तो किसी में 20 तो किसी में 35 म्यूटेशन तक पाए गए। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को सीवर में डेल्टा और अल्फा वैरिएंट भी मिला है। वहीं दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अमेरिका में मिले अलग-अलग वैरिएंट भी यहां पाए गए हैं।
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पुणे स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक सूक्ष्मजीव संग्रह (एनसीआईएम), गाजियाबाद स्थित वैज्ञानिक और अभिनव अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर), इकोसन सर्विसेज फाउंडेशन (ईएसएफ) और सीएसआईआर-नेशनल कैमिकल लेबोरेटरी ने मिलकर यह अध्ययन किया है जिसे मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित किया गया।
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अध्ययन के जरिये प्रारंभिक चेतावनी
एनसीआईएम के डॉ. महेश धरने ने बताया कि हमने खुले अपशिष्ट को लेकर यह अध्ययन किया जिसमें नालियों से सैंपल लेकर वायरस की जांच की गई। साथ ही उनके म्यूटेशन के बारे में भी पता किया गया। दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक किए इस अध्ययन में 108 म्यूटेशन पाए गए। वहीं छह नमूनों में 35 प्रकार के वायरस देखने को मिले हैं। उन्होंने अध्ययन में बताया है कि भारत में यह पहला अध्ययन है जिसने अपशिष्ट जल के जरिए म्यूटेशन का पता लगाया है। साथ ही एक प्रारंभिक चेतावनी भी इससे मिल रही है।
देश में कभी नहीं मिले ऐसे वैरिएंट, सीवर में मिले
वैज्ञानिकों ने चार ऐसे म्यूटेशन का भी पता लगाया है जिनका भारत में अभी तक एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। जबकि अन्य देशों में यह म्यूटेशन जरूर मिला है। डॉ.महेश धरने ने कहा कि चार वैरिएंट ऐसे भी मिले हैं जिनकी आज तक भारत में पहचान ही नहीं हुई है। इनकी पहचान एस:एन 801, एस:सी480आर, एनएसपी14:सी279एफ और एनएसपी3:एल550डीईएल के रूप में की है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सीवर में वायरस की मौजूदगी के अब तक काफी अध्ययन सामने आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ देशों ने सीवर के जरिये भी म्यूटेशन का पता लगाया है लेकिन भारत में अभी तक ऐसा अध्ययन नहीं हुआ है। इस पर और भी अध्ययन होने चाहिए ताकि हमें ज्यादा से ज्यादा म्यूटेशन और उनके असर का पता चल सके। - डॉ. दिव्येंदु वर्मा, जन स्वास्थ्य शोद्यार्थी
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अगर आप मुझसे पिछले साल म्यूटेशन के बारे में पूछते तो शायद मैं बहुत जानकारी नहीं दे सकता था लेकिन हां अब यह कहा जा सकता है कि भारत में नए म्यूटेशन की भरमार है और ऐसे अध्ययन उसके संकेत दे रहे हैं। - डॉ. रिजो एम जॉन, स्वास्थ्य विशेषज्ञ