इस पहलवान ने दी खली को चुनौती दम है तो मेरे साथ लड़ें कुश्ती
अंतरराष्ट्रीय कुश्ती पहलवान जगदीश कुमार ने डब्ल्यूडब्ल्यूई के विश्व प्रसिद्ध रेसलर द ग्रेट खली को विश्व के किसी भी रिंग में किसी भी स्टाइल में कुश्ती लड़ने की खुली चुनौती दी है।
वर्ष 1996 में ईरान में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 62 किलोग्राम भार वर्ग में देश को ब्रांज मेडल दिलाने वाले जगदीश का आरोप है कि डब्ल्यूडब्ल्यूई के माध्यम से गोरखधंधा चल रहा है। कुश्ती धार्मिक आस्था से जुड़ी प्रतियोगिता है।
पहलवान बनने के लिए कड़ी आस्था की जरूरत होती है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को कुश्ती का नाम देकर धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंचाई जा रही है। जगदीश ने कहा कि दलीप राणा उर्फ खली हिमाचल से हैं। इसलिए वह उनकी इज्जत करते हैं।
जगदीश ने 15 साल की उम्र में शुरू किया कुश्ती लड़ना
खली को बॉडी बिल्डर कहा जा सकता है। लेकिन उन्हें कभी पहलवान नहीं माना जा सकता। क्योंकि उन्होंने कभी भी क्वालिटी इवेंट में भाग नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि यदि खली असल में कुश्ती के हिमायती हैं तो वह राज्य में चार कुश्ती सेंटर खोल करके बताएं।
1975 में मंडी में जन्मे जगदीश कुमार ने 15 साल की आयु में कुश्ती लड़ना शुरू किया था। पहली बार जगदीश ने 1993 में स्कूल नेशनल में 60 किलो वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया। 1994 में कुश्ती संघ के फेडरेशन कप में नेशनल लेवल में गोल्ड जीता।
जगदीश 1994 से 1996 तक लगातार तीन बार हिमाचल कुश्ती में तीन बार गोल्ड जीता। वहीं 1996 में ईरान में वर्ल्ड चैंपियन में ब्रांज और ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में गोल्ड और फेडरेशन कप में गोल्ड जीता। 1996, 2000 और 2005 और 2008 में हिमाचल केसरी भी रहे हैं। इसके अलावा 1997 में सितारे हिंद खिताब जीता था। वर्तमान में पंजगई स्कूल में डीपीई की पोस्ट पर तैनात हैं।