{"_id":"68867882e6e6f2943f0ead77","slug":"villagers-anger-erupted-over-the-new-bpl-survey-policy-in-dhusara-una-news-c-93-1-una1002-160523-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: धुसाड़ा में नई बीपीएल सर्वेक्षण नीति पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: धुसाड़ा में नई बीपीएल सर्वेक्षण नीति पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
Mon, 28 Jul 2025 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 28 Jul 2025 12:35 AM IST
विज्ञापन
ग्राम पंचायत धुसाड़ा में ग्राम सभा में मौजूद ग्रामीण। -संवाद
बड़ूही (ऊना)। पंचायत धुसाड़ा में रविवार को हुई ग्राम सभा में सरकार की नई बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सर्वेक्षण नीति को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सभा में पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि ताजा गाइडलाइन के अनुसार पूरे पंचायत में केवल एक परिवार ही बीपीएल सूची के लिए पात्र पाया गया है, जबकि पहले यह संख्या 105 थी। इनमें से चार परिवारों ने स्वयं अपना नाम हटवाया था।
पंचायत प्रधान नीरु बाला ने बताया कि पहले बीपीएल परिवारों का चयन गांव की आम सहमति से होता था, लेकिन अब प्रक्रिया केवल सरकारी रिपोर्टों और पंचायत सचिव, पटवारी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संस्तुति पर आधारित हो गई है।
उन्होंने कहा कि यह प्रणाली जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती और असली जरूरतमंद इससे वंचित हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि विधवा महिला, जिसके पास एक पक्का कमरा हो लेकिन कोई कमाने वाला न हो, उसे भी सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
उपप्रधान सहदेव ने नई बीपीएल नीति को गरीब विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। ग्राम प्रधान ने कहा कि सरकार को बीपीएल चयन प्रक्रिया में लचीलापन लाना चाहिए ताकि असल गरीबों को लाभ मिल सके। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं गरीबों के लिए पूरी तरह मुफ्त करने की जरूरत पर जोर दिया।
विज्ञापन
पंचायत प्रधान नीरु बाला ने बताया कि पहले बीपीएल परिवारों का चयन गांव की आम सहमति से होता था, लेकिन अब प्रक्रिया केवल सरकारी रिपोर्टों और पंचायत सचिव, पटवारी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संस्तुति पर आधारित हो गई है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यह प्रणाली जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती और असली जरूरतमंद इससे वंचित हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि विधवा महिला, जिसके पास एक पक्का कमरा हो लेकिन कोई कमाने वाला न हो, उसे भी सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
उपप्रधान सहदेव ने नई बीपीएल नीति को गरीब विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। ग्राम प्रधान ने कहा कि सरकार को बीपीएल चयन प्रक्रिया में लचीलापन लाना चाहिए ताकि असल गरीबों को लाभ मिल सके। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं गरीबों के लिए पूरी तरह मुफ्त करने की जरूरत पर जोर दिया।