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आखिरकार सऊदी अरब से लौटा पिरथीपुर का उमेश
ब्यूरो, अमर उजाला दौलतपुर (ऊना)
Updated Sun, 22 May 2016 12:02 AM IST
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उमेश्ा पत्नी, बच्चे के साथ्ा।
- फोटो : अमर उजाला
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आखिरकार चार साल के अरसे के बाद एक पिता अपने बेटे, पत्नी अपने पति और बेटी अपने पापा से मिल पाई है। पिरथीपुर का उमेश रविवार को सऊदी अरब से घर लौट आया। खाड़ी देश सऊदी अरब में गुलामों जैसी जिंदगी के चार साल काटकर उमेश अब सपने भी सऊदी का ख्वाब नहीं देखना चाहता। बकौल उमेश सऊदी अरब में कई भारतीय प्रताड़ना से भरी गुलामों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। रोजी-रोटी की तलाश में सात-समंदर पार बैठे लोग अपने देश लौटने की आस लगाए हैं, लेकिन कइयों की उम्मीद इंतजार में धूमिल हो रही है।
उमेश का पासपोर्ट सऊदी अरब स्थित उसकी कंपनी ने जब्त कर लिया था। उसके संघर्ष की दास्तां को अमर उजाला ने सर्वप्रथम 12 फरवरी के संस्करण में उठाया था। उसके बाद सिलसिलेवार खबरों से उमेश और उसके अन्य साथियों के संघर्ष को उजागर किया।
उमेश के घर जश्न जैसा माहौल है। पिता देशराज और पत्नी अनुराधा उमेश से मिलकर भावुक हो गए। नन्हीं बेटी भावना पिता को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ रही। उमेश ने बताया कि सऊदी अरब में उसे अमानवीय यातनाओं का सामना करना पड़ा। उसे अधिकतर समय काम करना पड़ता लेकिन मेहनताने के नाम पर चंद पैसे ही दिए जाते थे। उमेश ने बताया कि बाकी युवकों के साथ भी वहां अत्याचार हो रहा है और वहां की सरकार भी उनकी नहीं सुनती है। अत: वह कभी लौटकर सऊदी नहीं जाना चाहता। उसने बताया कि शुरू में उसने वापसी की आस तक छोड़ दी थी, लेकिन मीडिया के दबाव के बाद भारतीय उच्चायोग में कार्यरत वेंकटेश, इमदाद आदि ने मदद की।
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वेलफेयर सोसायटी चलाने वाले पाशा निवासी कोच्चि ने उसकी मदद की। जिसकी वजह से वो जिंदा वापस लौट सका है। इसके अतिरिक्त तेलंगाना के भाजपा सांसद एवं आईटी सेल प्रभारी टीआर श्रीनिवासन ने उसकी भारत पहुंचाने में की है। साथ ही उसने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का भी आभार जताया। उमेश ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रभावी ढंग से मुद्दा न उठाने पर अफसोस जाहिर किया। इस अवसर पर उमेश की दादी प्रीतो देवी, पिता देशराज शर्मा, पत्नी अनुराधा, बेटी भावना, ग्राम पंचायत प्रधान अशोक शर्मा, भाजपा नेता वरिंद्र बॉबी, हेमराज, अजय शर्मा, छोटू शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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उमेश का पासपोर्ट सऊदी अरब स्थित उसकी कंपनी ने जब्त कर लिया था। उसके संघर्ष की दास्तां को अमर उजाला ने सर्वप्रथम 12 फरवरी के संस्करण में उठाया था। उसके बाद सिलसिलेवार खबरों से उमेश और उसके अन्य साथियों के संघर्ष को उजागर किया।
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उमेश के घर जश्न जैसा माहौल है। पिता देशराज और पत्नी अनुराधा उमेश से मिलकर भावुक हो गए। नन्हीं बेटी भावना पिता को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ रही। उमेश ने बताया कि सऊदी अरब में उसे अमानवीय यातनाओं का सामना करना पड़ा। उसे अधिकतर समय काम करना पड़ता लेकिन मेहनताने के नाम पर चंद पैसे ही दिए जाते थे। उमेश ने बताया कि बाकी युवकों के साथ भी वहां अत्याचार हो रहा है और वहां की सरकार भी उनकी नहीं सुनती है। अत: वह कभी लौटकर सऊदी नहीं जाना चाहता। उसने बताया कि शुरू में उसने वापसी की आस तक छोड़ दी थी, लेकिन मीडिया के दबाव के बाद भारतीय उच्चायोग में कार्यरत वेंकटेश, इमदाद आदि ने मदद की।
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वेलफेयर सोसायटी चलाने वाले पाशा निवासी कोच्चि ने उसकी मदद की। जिसकी वजह से वो जिंदा वापस लौट सका है। इसके अतिरिक्त तेलंगाना के भाजपा सांसद एवं आईटी सेल प्रभारी टीआर श्रीनिवासन ने उसकी भारत पहुंचाने में की है। साथ ही उसने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का भी आभार जताया। उमेश ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रभावी ढंग से मुद्दा न उठाने पर अफसोस जाहिर किया। इस अवसर पर उमेश की दादी प्रीतो देवी, पिता देशराज शर्मा, पत्नी अनुराधा, बेटी भावना, ग्राम पंचायत प्रधान अशोक शर्मा, भाजपा नेता वरिंद्र बॉबी, हेमराज, अजय शर्मा, छोटू शर्मा आदि उपस्थित रहे।