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Una News: चेक बाउंस मामले में दोषी को 6 महीने साधारण कारावास की सजा
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25 लाख रुपये मुआवजा भी शिकायतकर्ता को देना पड़ेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। न्यायिक दंडाधिकारी ऊना की अदालत ने चेक बाउंस मामले में जोगिंद्र लाल निवासी गांव त्यार बंगाणा जिला ऊना को 6 महीने साधारण कारावास और 25 लाख रुपये मुआवजा शिकायतकर्ता को अदा करने की सजा सुनाई है। एक आरोपी नीना कुमारी को दोष मुक्त करके बरी कर दिया। अधिवक्ता आशीष वर्मा ने बताया कि शिकायतकर्ता हेमराज ऊना लिक्विड की सेल-परचेज का काम करता है। वर्ष 2018 में आरोपी ने शिकायतकर्ता से 22 लाख 56 हजार 190 रुपये की लिक्विड की खरीदारी की थी और पेमेंट की एवज में शिकायतकर्ता को 22 लाख रुपये का चेक जारी किया था। इसे भुगतान के लिए शिकायतकर्ता ने बैंक में लगाया लेकिन पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसकी सूचना दोषी को शिकायतकर्ता की ओर से फोन के माध्यम से दी गई और कानूनी नोटिस भी भेजा गया लेकिन उसने शिकायतकर्ता को कोई पेमेंट नहीं की। इसके बाद मजबूरन शिकायतकर्ता को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत दोषी के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दर्ज करवाना पड़ा और यहां पर कोर्ट ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों की जांच करने के बाद शिकायतकर्ता की शिकायत को उचित मानते हुए दोषी को उपरोक्त सजा सुनाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। न्यायिक दंडाधिकारी ऊना की अदालत ने चेक बाउंस मामले में जोगिंद्र लाल निवासी गांव त्यार बंगाणा जिला ऊना को 6 महीने साधारण कारावास और 25 लाख रुपये मुआवजा शिकायतकर्ता को अदा करने की सजा सुनाई है। एक आरोपी नीना कुमारी को दोष मुक्त करके बरी कर दिया। अधिवक्ता आशीष वर्मा ने बताया कि शिकायतकर्ता हेमराज ऊना लिक्विड की सेल-परचेज का काम करता है। वर्ष 2018 में आरोपी ने शिकायतकर्ता से 22 लाख 56 हजार 190 रुपये की लिक्विड की खरीदारी की थी और पेमेंट की एवज में शिकायतकर्ता को 22 लाख रुपये का चेक जारी किया था। इसे भुगतान के लिए शिकायतकर्ता ने बैंक में लगाया लेकिन पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसकी सूचना दोषी को शिकायतकर्ता की ओर से फोन के माध्यम से दी गई और कानूनी नोटिस भी भेजा गया लेकिन उसने शिकायतकर्ता को कोई पेमेंट नहीं की। इसके बाद मजबूरन शिकायतकर्ता को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत दोषी के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दर्ज करवाना पड़ा और यहां पर कोर्ट ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों की जांच करने के बाद शिकायतकर्ता की शिकायत को उचित मानते हुए दोषी को उपरोक्त सजा सुनाई।