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Una News: टकारला स्कूल बना तालाब, घुटनों तक पानी में बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे
Sat, 23 Aug 2025 07:33 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 23 Aug 2025 07:33 AM IST
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टकारला स्कूल के कमरे में घुसा बारिश का पानी और कीचड़। संवाद
बड़ूही (ऊना)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टकारला पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के कारण जलमग्न हो गई है। बुधवार को हुई तेज बारिश के बाद स्कूल परिसर पूरी तरह तालाब में तब्दील हो गया। हालात इतने गंभीर हैं कि बच्चे कीचड़ और घुटनों तक पानी में बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं।
स्कूल में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे भवन की नींव से रिसकर कमरे भी पानी से भर गए हैं। इससे भवन की संरचना को खतरा उत्पन्न हो गया है और बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। पाठशाला में 181 छात्र और 17 शिक्षक-स्टाफ कार्यरत हैं। मगर प्रशासनिक अनदेखी के चलते न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों की जान को भी खतरा है।
स्थानीय अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही स्थिति बनती है और प्रशासन केवल आश्वासन देकर चुप बैठ जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि जब बच्चे पानी में बैठकर पढ़ेंगे तो उनका भविष्य कैसा होगा। अगर कोई हादसा हो गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा।
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वहीं, स्थानीय पंचायत प्रधान और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने वीरवार को मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि स्कूल भवन सड़क और नाले से नीचे है, जिससे पानी आसानी से स्कूल में घुस जाता है और निकासी संभव नहीं हो पाती। प्रधानाचार्य अनिल बक्शी ने कहा कि मामले की सूचना जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम अंब को दी गई है। बच्चों को अस्थायी रूप से दूसरे भवन में शिफ्ट किया गया है, लेकिन वहां बिजली नहीं है, जिससे और परेशानियां हो रही हैं।
एसडीएम अंब सचिन शर्मा ने कहा कि खेतों से आने वाले पानी की रोकथाम के लिए तकनीकी टीम से रिपोर्ट मांगी गई है। शिक्षा विभाग के उच्चतर उपनिदेशक अनिल कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और कहा कि स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
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स्कूल में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे भवन की नींव से रिसकर कमरे भी पानी से भर गए हैं। इससे भवन की संरचना को खतरा उत्पन्न हो गया है और बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। पाठशाला में 181 छात्र और 17 शिक्षक-स्टाफ कार्यरत हैं। मगर प्रशासनिक अनदेखी के चलते न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों की जान को भी खतरा है।
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स्थानीय अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही स्थिति बनती है और प्रशासन केवल आश्वासन देकर चुप बैठ जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि जब बच्चे पानी में बैठकर पढ़ेंगे तो उनका भविष्य कैसा होगा। अगर कोई हादसा हो गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा।
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वहीं, स्थानीय पंचायत प्रधान और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने वीरवार को मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि स्कूल भवन सड़क और नाले से नीचे है, जिससे पानी आसानी से स्कूल में घुस जाता है और निकासी संभव नहीं हो पाती। प्रधानाचार्य अनिल बक्शी ने कहा कि मामले की सूचना जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम अंब को दी गई है। बच्चों को अस्थायी रूप से दूसरे भवन में शिफ्ट किया गया है, लेकिन वहां बिजली नहीं है, जिससे और परेशानियां हो रही हैं।
एसडीएम अंब सचिन शर्मा ने कहा कि खेतों से आने वाले पानी की रोकथाम के लिए तकनीकी टीम से रिपोर्ट मांगी गई है। शिक्षा विभाग के उच्चतर उपनिदेशक अनिल कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और कहा कि स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।