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रैगिंग प्रकरण में दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई : एबीवीपी
Sun, 19 Apr 2026 07:22 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 19 Apr 2026 07:22 AM IST
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ऊना। पंडोगा स्थित शिक्षण संस्थान में सामने आए रैगिंग एवं छात्र के साथ मारपीट के मामले ने छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। परिषद ने इसे शिक्षा के मूल्यों, अनुशासन और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के खिलाफ गंभीर अपराध बताया है।
जानकारी के अनुसार संस्थान के हॉस्टल में रह रहे एक छात्र के साथ रैगिंग के नाम पर अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई, जिसे लेकर व्यापक रोष है। एबीवीपी ने कहा कि संस्थान प्रबंधन द्वारा आरोपी छात्र को निष्कासित करना और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करना सकारात्मक कदम है लेकिन केवल प्रारंभिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिषद ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है ताकि सभी दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री अवि ठाकुर ने कहा कि रैगिंग जैसी अमानवीय कुप्रथा का किसी भी शिक्षण संस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। इसके लिए संस्थानों में सक्रिय एंटी-रैगिंग समितियों का गठन, नियमित निगरानी और छात्रों के बीच जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। इसके साथ नवप्रवेशी छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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जानकारी के अनुसार संस्थान के हॉस्टल में रह रहे एक छात्र के साथ रैगिंग के नाम पर अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई, जिसे लेकर व्यापक रोष है। एबीवीपी ने कहा कि संस्थान प्रबंधन द्वारा आरोपी छात्र को निष्कासित करना और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करना सकारात्मक कदम है लेकिन केवल प्रारंभिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिषद ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है ताकि सभी दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री अवि ठाकुर ने कहा कि रैगिंग जैसी अमानवीय कुप्रथा का किसी भी शिक्षण संस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। इसके लिए संस्थानों में सक्रिय एंटी-रैगिंग समितियों का गठन, नियमित निगरानी और छात्रों के बीच जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। इसके साथ नवप्रवेशी छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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