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जिला ऊना में बढ़ी बेटियों की संख्या
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऊना
Updated Fri, 22 Jan 2016 06:55 PM IST
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ऊना। बेटियों की कम संख्या के चलते प्रदेश के सबसे कम लिंगानुपात वाले जिले में शुमार ऊना के माथे से यह कलंक जल्द धुलने जा रहा है।
ऊना में बेटियों की संख्या बढ़ी है और यह आंकड़ा प्रति हजार लड़कों पर 875 से बढ़कर 900 तक पहुंच गया है, जो जिले के लिए खुशखबरी है।
जिला ऊना में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में जिले में 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग में शिशु लिंगानुपात की दर जनगणना 2011 में 875 के मुकाबले अब बढ़कर 900 हो गई है। शुक्रवार को हरोली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत गोंदपुर बुल्ला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उद्योगमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर प्राप्त आंकड़ों पर तैयार शिशु लिंगानुपात डाटा बोर्ड को जारी किया। इस अवसर पर उद्योगमंत्री ने प्रगति के प्रतीक दो कबूतरों को भी उड़ाया। उद्योगमंत्री ने जिले में शिशु लिंगानुपात में हुए सुधार को लेकर जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऊना जिला का जिक्र बड़ी तेजी के साथ विकसित होने वाले जिलों में किया जाता है, लेकिन खेद का विषय है कि इस जिले में शिशु लिंगानुपात की दर प्रदेश के अन्य जिलों में सबसे कम है, जोकि जिले की साख पर एक धब्बे जैसा है। उन्होंने बताया कि जिले में तीन वर्षों में शिशु लिंगानुपात की दर में 10 प्वाइंट की वृद्धि के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले गत चार वर्षों में 25 प्वाइंट की वृद्धि दर्ज होना एक सुखद अहसास है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिला प्रशासन के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं सहित जन साधारण के सहयोग से भविष्य में इससे कहीं और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
ऊना में बेटियों की संख्या बढ़ी है और यह आंकड़ा प्रति हजार लड़कों पर 875 से बढ़कर 900 तक पहुंच गया है, जो जिले के लिए खुशखबरी है।
जिला ऊना में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में जिले में 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग में शिशु लिंगानुपात की दर जनगणना 2011 में 875 के मुकाबले अब बढ़कर 900 हो गई है। शुक्रवार को हरोली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत गोंदपुर बुल्ला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उद्योगमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर प्राप्त आंकड़ों पर तैयार शिशु लिंगानुपात डाटा बोर्ड को जारी किया। इस अवसर पर उद्योगमंत्री ने प्रगति के प्रतीक दो कबूतरों को भी उड़ाया। उद्योगमंत्री ने जिले में शिशु लिंगानुपात में हुए सुधार को लेकर जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऊना जिला का जिक्र बड़ी तेजी के साथ विकसित होने वाले जिलों में किया जाता है, लेकिन खेद का विषय है कि इस जिले में शिशु लिंगानुपात की दर प्रदेश के अन्य जिलों में सबसे कम है, जोकि जिले की साख पर एक धब्बे जैसा है। उन्होंने बताया कि जिले में तीन वर्षों में शिशु लिंगानुपात की दर में 10 प्वाइंट की वृद्धि के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले गत चार वर्षों में 25 प्वाइंट की वृद्धि दर्ज होना एक सुखद अहसास है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिला प्रशासन के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं सहित जन साधारण के सहयोग से भविष्य में इससे कहीं और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
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