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Una News: पंडोगा ने खोया जांबाज बेटा, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

Fri, 07 Jun 2024 11:51 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 07 Jun 2024 11:51 AM IST
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Pandoga lost his brave son, bid last farewell with tearful eyes
शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद
सैनिक पुत्र को खोकर बुजुर्ग माता सदमे में, बड़े बेटे ने दी चिता को आग
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लोगों ने कहा- पूरे गांव को कुलविंदर सिंह की कुर्बानी पर गर्व

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिला के हरोली विधानसभा क्षेत्र के पंडोगा गांव ने मंगलवार को अपना एक जांबाज सैनिक, बेटा और भाई कुलविंदर सिंह खो दिया। 42 साल के कुलविंदर सिंह डोगरा रेजीमेंट में तैनात थे। उनकी ड्यूटी जम्मू में थी। करीब 20 दिन पहले आर्मी कैंप के जंगल में आग भड़की तो कुलविंदर अपने साथी जवानों के साथ आग पर काबू पाने में जुट गए, लेकिन जंगल में आग इतनी तीव्र गति से फैली की कुलविंदर आग से चारों ओर से घिर गए। देखते ही देखते आग की लपटें उनके कपड़ों तक पहुंच गईं। इस दौरान कुलविंदर सिंह ने बहादुरी का परिचय दिया और कपड़ों पर लगी आग के साथ लपटों से बाहर निकले और किसी तरह आग को बुझाया। इस आग से बाहर निकलते और कपड़ों को खुद से अलग करते समय कुलविंदर 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए। उन्होंने आर्मी अस्पताल ऊधमपुर में करीब 20 दिन तक मौत से लड़ाई लड़ी, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। बीते मंगलवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
बुधवार शाम जब कुलविंदर सिंह का शव उनके पैतृक गांव पंडोगा में उनके निवास पर पहुंचा तो चीखो पुकार मच गई। कुलविंदर सिंह की मां विजय कुमारी और उनकी पत्नी कंचन ठाकुर का रो-रो कर बुरा हाल था। वहीं, उनके दोनों बेटे अर्णव ठाकुर और आयांश ठाकुर भी यह समझ चुके थे कि पिता का साया उनके सिर से छिन चुका है। दोनों बच्चे पिता के अंतिम संस्कार में बेहद भावुक नजर आए। हालांकि आसपास मौजूद सगे संबंधियों ने परिवार का हौसला बढ़ाया। बेटे के जाने से पिता धरमबीर सिंह कुछ बोलने की हालत में नहीं दिखे। उन्होंने गम के पहाड़ को सीने में पसीज कर अंतिम संस्कार तक मौन साधे रखा। वहीं, बड़े बेटे गुलविंदर गोल्डी ने इस गम की घड़ी में हौसला बनाए रखा और पिता को सहारा दिया। पिता धरमबीर सिंह ने बेटे की शहादत पर बस इतना कहा कि उनके दो बेटे सेना में और बड़ा बेटा ग्राम पंचायत पंडोगा का प्रधान है। देशसेवा का जज्बा पूरे परिवार में है। बेटे के बलिदान का गम तो बहुत बड़ा है, लेकिन गर्व भी है कि देश सेवा करते समय बेटे के प्राण न्योछावर हुए।
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बचपन से ही साहसिक थे कुलविंदर
खंड किसान सलाहकार समिति अध्यक्ष हरोली अमित ठाकुर ने कहा कि कुलविंदर सिंह बचपन से ही साहसिक और देशसेवा के लिए उत्साहित रहते थे। स्कूल शिक्षा के कुछ समय बाद ही उनका चयन सेना में हुआ। इस समय हवलदार रैंक पर सेवाएं दे रहे थे कि यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा पंडोगा गांव और हरोली क्षेत्र परिवार के साथ खड़ा है।
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पूरे हरोली को अपने वीर सपूत पर गर्व
हरोली भाजपा नेता प्रो. राम कुमार ने कहा कि कुलविंदर सिंह एक बहादुर जवान थे। उन्होंने सेना में रहते हुए आतंकियों के खिलाफ कई ऑपरेशन को पूरा करने में भूमिका निभाई। कहा कि बड़े भाई पंडोगा के प्रधान गुलविंदर गोल्डी से कुलविंदर की बहादुरी के कई किस्से सुने थे। उन्होंने इस बहादुर जवान की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पूरा हरोली अपने वीर सपूत पर गर्व कर रहा है।

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शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद

शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद

शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद

शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद

शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद

शहीद बेटे कुलविंदर सिंह को श्रद्धांजलि देते पिता धर्मबीर सिंह। स्रोत संवाद

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