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Una News: सावन के पहले सोमवार को हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे शिवालय
Tue, 15 Jul 2025 06:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 15 Jul 2025 06:04 AM IST
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सदा शिव ध्यूसंर महादेव मंदिर तलमेहडा में सावन के पहले सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करते शिवभ
बंगाणा/गगरेट/भरवाईं (ऊना)। सावन माह के पहले सोमवार को जिला के शिवालयों में भक्तों की रौनक देखी गई। सुबह के समय श्रद्धालुओं ने कतारों में लगकर हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए पावन शिवलिंग को बिलपत्र, फूल, धतूरा, चावल, भांग की पत्तियां और जल अर्पित किया। खासकर शिवबाड़ी, ध्यूंसर महादेव, बनौड़े महादेव, महादेव मंदिर में भक्तों की खासी रौनक रही।
बंगाणा क्षेत्र के प्रसिद्ध व ऐतिहासिक सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर तलमेहड़ा में सावन माह में पांच सोमवार को भक्तों का मंदिर में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। शिव मंदिर के पुजारी राकेश शर्मा का कहना है कि सावन माह में शिव पूजा के साथ-साथ शिव पिंडी पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। रविवार रात को जागरण तथा सोमवार को मंदिर में भक्तों ने भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। सावन माह के पहले सोमवार से ही भक्तजनों का तांता लगा हुआ है। सुबह चार बजे से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन प्रवीण शर्मा का कहना है कि मंदिर परिसर में पहुंचने वाले सभी भक्तजनों के लिए पूरा प्रबंध किया गया है। बाहर से आने वाले सभी भक्तों से स्वच्छता व अनुशासन में सहयोग करने का आह्वान किया।
गगरेट के प्राचीन द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी मे सोमवार को सुबह से ही शिव भक्तो की लाइनें लगनी शुरू हो गई। हालांकि कांवड़ यात्रा पूर्णिमा से शुरू हो गई परंतु प्रदेश में श्रावण मास संक्रांति से शुरू होगा। शिव भक्त भगवान शिव की अलौकिक पिंडी पर जल, दूध, बिलपत्र, भांग की पत्तियां व धतूरा अर्पित कर मंगलमय भविष्य की कामना कर रहे है।
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प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी में स्थित शिव मंदिरों में भक्तों ने माथा टेका और पूजा-अर्चना की। इस दौरान भक्तों ने भगवान शिव की विशेष पूजा की और जलाभिषेक किया।
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बंगाणा क्षेत्र के प्रसिद्ध व ऐतिहासिक सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर तलमेहड़ा में सावन माह में पांच सोमवार को भक्तों का मंदिर में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। शिव मंदिर के पुजारी राकेश शर्मा का कहना है कि सावन माह में शिव पूजा के साथ-साथ शिव पिंडी पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। रविवार रात को जागरण तथा सोमवार को मंदिर में भक्तों ने भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। सावन माह के पहले सोमवार से ही भक्तजनों का तांता लगा हुआ है। सुबह चार बजे से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन प्रवीण शर्मा का कहना है कि मंदिर परिसर में पहुंचने वाले सभी भक्तजनों के लिए पूरा प्रबंध किया गया है। बाहर से आने वाले सभी भक्तों से स्वच्छता व अनुशासन में सहयोग करने का आह्वान किया।
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गगरेट के प्राचीन द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी मे सोमवार को सुबह से ही शिव भक्तो की लाइनें लगनी शुरू हो गई। हालांकि कांवड़ यात्रा पूर्णिमा से शुरू हो गई परंतु प्रदेश में श्रावण मास संक्रांति से शुरू होगा। शिव भक्त भगवान शिव की अलौकिक पिंडी पर जल, दूध, बिलपत्र, भांग की पत्तियां व धतूरा अर्पित कर मंगलमय भविष्य की कामना कर रहे है।
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प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी में स्थित शिव मंदिरों में भक्तों ने माथा टेका और पूजा-अर्चना की। इस दौरान भक्तों ने भगवान शिव की विशेष पूजा की और जलाभिषेक किया।