{"_id":"6adb488a9f8a63137c0ddea8","slug":"mona-from-ambota-becomes-self-reliant-inspired-and-skilled-thanks-to-her-mother-in-law-una-news-c-93-1-una1002-210959-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: जलवायु चुनौतियों के समाधान में भूगोल अहम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: जलवायु चुनौतियों के समाधान में भूगोल अहम
विज्ञापन
ऊना में राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू, विशेषज्ञों ने सतत विकास पर किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच सतत विकास की योजनाओं में भूगोल की भूमिका अहम है। इसी विषय पर राजकीय महाविद्यालय ऊना में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ हिमाचल प्रदेश (जीएसएचपी) की पांचवीं वार्षिक बैठक शुरू हुई।
अनिश्चितता के दौर में भूगोल एवं अनुकूलनशील शासन व्यवस्था : आजीविका, स्थानिक न्याय और एक सुदृढ़ भारत विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों, भूगोल विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया। आयोजन महाविद्यालय के भूगोल विभाग और जीएसएचपी ने संयुक्त रूप से किया। इसे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग ऑर्गनाइजेशन, कोलकाता ने प्रायोजित किया है।
मुख्य अतिथि एनएटीएमओ के निदेशक डॉ. विनोद कुमार सिंह और मुख्य वक्ता प्रो. नरेंद्र कुमार राणा का हिमाचली परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीता शर्मा ने इसे शोध और अकादमिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बताया। जीएसएचपी के महासचिव डॉ. बीआर ठाकुर ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि अध्यक्ष डॉ. डीडी शर्मा ने समकालीन चुनौतियों के अध्ययन में भूगोल की भूमिका बताई। इस अवसर पर संगोष्ठी की सारांश पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच सतत विकास की योजनाओं में भूगोल की भूमिका अहम है। इसी विषय पर राजकीय महाविद्यालय ऊना में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और जियोग्राफिकल सोसाइटी ऑफ हिमाचल प्रदेश (जीएसएचपी) की पांचवीं वार्षिक बैठक शुरू हुई।
अनिश्चितता के दौर में भूगोल एवं अनुकूलनशील शासन व्यवस्था : आजीविका, स्थानिक न्याय और एक सुदृढ़ भारत विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों, भूगोल विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया। आयोजन महाविद्यालय के भूगोल विभाग और जीएसएचपी ने संयुक्त रूप से किया। इसे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग ऑर्गनाइजेशन, कोलकाता ने प्रायोजित किया है।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि एनएटीएमओ के निदेशक डॉ. विनोद कुमार सिंह और मुख्य वक्ता प्रो. नरेंद्र कुमार राणा का हिमाचली परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीता शर्मा ने इसे शोध और अकादमिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बताया। जीएसएचपी के महासचिव डॉ. बीआर ठाकुर ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि अध्यक्ष डॉ. डीडी शर्मा ने समकालीन चुनौतियों के अध्ययन में भूगोल की भूमिका बताई। इस अवसर पर संगोष्ठी की सारांश पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
विज्ञापन