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Una News: शिक्षा विभाग कार्यालय समक्ष गरजे मिड-डे मील कर्मी
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ऊना। मिड-डे मील यूनियन की ओर से शिक्षा विभाग कार्यालय ऊना के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। इसके बाद उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोमलाल धीमान को मांगपत्र भी सौंपा। इसमें उनकी मांगों पर विचार करने और उनका समाधान करने की अपील की गई।
जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर को जिले के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील कर्मी शिक्षा विभाग कार्यालय के बाहर एकत्रित हो गए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह धरना-प्रदर्शन सीटू के बैनर तले हुआ। मिड-डे मील यूनियन होना की प्रधान बलविंदर कौर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कई कर्मियों को चार महीने का वेतन नहीं मिला है जबकि उनका पहले ही वेतन बहुत कम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मिड-डे-मिल कर्मियों के लिए 4,500 रुपये प्रति माह का वेतन घोषित किया हुआ है। इतनी कम राशि कहीं भी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि एक तो पहले ही कम राशि दी जाती है और वह भी समय पर नहीं मिलती। इससे कर्मियों का गुजारा करना काफी मुश्किल हो गया है।
बलविंदर कौर ने कहा कि ऊना में गगरेट, जोल और बंगाणा के कुछ स्कूल सरकार ने बंद कर दिए। इस दौरान उन स्कूलों में मिड-डे मील कर्मी बेरोजगार हो गए। उन कर्मियों को किसी भी अन्य स्कूलों में शिफ्ट नहीं किया गया। सरकार उन्हें अन्य पास लगते स्कूलों में तैनात करे। उन्होंने कहा कि मिड-डे मील कर्मियों को कोर्ट के आदेश अनुसार 12 महीने वेतन दिया जाए। बलविंदर कौर ने कहा कि स्कूलों को बंद कर प्रदेश सरकार ने गरीब विरोधी फैसला लिया। उन्होंने की उठाई कि आंगनबाड़ी और आशा वर्कर की तर्ज पर मिड-डे मील कर्मियों को भी 20 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाए। इसके साथ ही वर्कर्स को वर्दी भी मिले और हरियाणा सरकार की तर्ज पर 7,000 रुपये वेतन दिया जाए। कहा कि कर्मियों से चपरासी, माली, सफाई सेवक आदि का काम न करवाया जाए। कई स्कूल अध्यापक खाना खाने के बाद मिड-डे मिल कर्मियों से बर्तन साफ करवाते हैं, उसे बंद करवाया जाए। कहा कि जिले में कुछ स्कूलों में मिड-डे मील कर्मियों से सुबह 6:00 से लेक दोपहर 3:00 बजे तक काम करवाया जाता है जो गलत है। अगर इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया जाता है तो यूनियन संघर्ष को करने पर मजबूर हो जाएगी। इसकी जिम्मेदारी उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा और जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर सीटू जिला सचिव गुरनाम सहित बड़ी संख्या में मिड-डे मील कर्मी मौजूद रहे।
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जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर को जिले के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील कर्मी शिक्षा विभाग कार्यालय के बाहर एकत्रित हो गए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह धरना-प्रदर्शन सीटू के बैनर तले हुआ। मिड-डे मील यूनियन होना की प्रधान बलविंदर कौर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कई कर्मियों को चार महीने का वेतन नहीं मिला है जबकि उनका पहले ही वेतन बहुत कम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मिड-डे-मिल कर्मियों के लिए 4,500 रुपये प्रति माह का वेतन घोषित किया हुआ है। इतनी कम राशि कहीं भी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि एक तो पहले ही कम राशि दी जाती है और वह भी समय पर नहीं मिलती। इससे कर्मियों का गुजारा करना काफी मुश्किल हो गया है।
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बलविंदर कौर ने कहा कि ऊना में गगरेट, जोल और बंगाणा के कुछ स्कूल सरकार ने बंद कर दिए। इस दौरान उन स्कूलों में मिड-डे मील कर्मी बेरोजगार हो गए। उन कर्मियों को किसी भी अन्य स्कूलों में शिफ्ट नहीं किया गया। सरकार उन्हें अन्य पास लगते स्कूलों में तैनात करे। उन्होंने कहा कि मिड-डे मील कर्मियों को कोर्ट के आदेश अनुसार 12 महीने वेतन दिया जाए। बलविंदर कौर ने कहा कि स्कूलों को बंद कर प्रदेश सरकार ने गरीब विरोधी फैसला लिया। उन्होंने की उठाई कि आंगनबाड़ी और आशा वर्कर की तर्ज पर मिड-डे मील कर्मियों को भी 20 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाए। इसके साथ ही वर्कर्स को वर्दी भी मिले और हरियाणा सरकार की तर्ज पर 7,000 रुपये वेतन दिया जाए। कहा कि कर्मियों से चपरासी, माली, सफाई सेवक आदि का काम न करवाया जाए। कई स्कूल अध्यापक खाना खाने के बाद मिड-डे मिल कर्मियों से बर्तन साफ करवाते हैं, उसे बंद करवाया जाए। कहा कि जिले में कुछ स्कूलों में मिड-डे मील कर्मियों से सुबह 6:00 से लेक दोपहर 3:00 बजे तक काम करवाया जाता है जो गलत है। अगर इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया जाता है तो यूनियन संघर्ष को करने पर मजबूर हो जाएगी। इसकी जिम्मेदारी उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा और जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर सीटू जिला सचिव गुरनाम सहित बड़ी संख्या में मिड-डे मील कर्मी मौजूद रहे।
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