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Una News: अध्यापकों की सेवानिवृत्ति और ट्रांसफर से सूने पड़े कई स्कूल

Tue, 28 Apr 2026 06:30 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 28 Apr 2026 06:30 AM IST
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Many schools are deserted due to retirement and transfer of teachers.
ऊना। जिले में अध्यापकों की सेवानिवृत्ति और तबादलों के चलते कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी गहराने लगी है। हालात ये हैं कि कुछ विद्यालयों में कक्षाएं तक शिक्षक विहीन हो गई हैं जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रधानाचार्यों को आपसी समन्वय बनाकर व्यवस्था संभालने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्कूल में पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए और प्रत्येक कक्षा में शिक्षक की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। निर्देशों के तहत जिन स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हो गए हैं, वहां अन्य विद्यालयों से अध्यापकों को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर तैनात किया जाएगा। यह व्यवस्था अस्थायी तौर पर लागू रहेगी ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना रुकावट जारी रह सके।
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शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि परिसर के भीतर कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं रहना चाहिए। साथ ही, शैक्षणिक घंटों के दौरान किसी भी कक्षा को बिना शिक्षक के नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए प्रधानाचार्यों को आवश्यकतानुसार किसी भी शिक्षक को, उसके पदनाम की परवाह किए बिना, एक या अधिक दिनों के लिए दूसरे विद्यालय में प्रतिनियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। उदाहरण के तौर पर जरूरत पड़ने पर जूनियर अध्यापक को वरिष्ठ कक्षाओं में पढ़ाने के लिए भेजा जा सकता है और वरिष्ठ शिक्षक को जूनियर कक्षाओं में लगाया जा सकता है।
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25 फीसदी स्कूलों में अध्यापकों की कमी
ध्यान रहे कि जिला के कुल सरकारी स्कूलों में से 25 प्रतिशत में अध्यापकों की कमी है। बच्चों की पढ़ाई अध्यापकों की तैनाती न होने से प्रभावित हो रही है। वहीं 40 प्रतिशत स्कूलों में अभी भी किसी न किसी विषय पर तैनाती नहीं है। हालांकि वहां अध्यापकों का अधिक संकट नहीं है। कई स्कूलों में अपने स्तर पर या समाजसेवियों के सहयोग से अध्यापकों की तैनाती की गई है। अब जिन स्कूलों में अध्यापकों का अधिक संकट है, वहां खाली पदों की भरपाई के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
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उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान का कहना है कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों के हित में की गई है ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। साथ ही खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी अलग से जारी है।
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