डायरिया की चपेट में नौनिहाल
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जिले में गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ने के साथ कई प्रकार की बीमारियों ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के चलते लोग डायरिया की चपेट में आने लगे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छोटी उम्र के बच्चों पर ज्यादा पड़ रहा है। इनमें उल्टी-दस्त, बुखार और पीलिया जैसे रोग लोगों को अपनी जकड़ में ले रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में इन दिनों डायरिया के मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं। अस्पताल में ही रोजाना उल्टी-दस्त, बुखार और टायफायड के करीब 70 से 80 मरीज पहुंच रहे हैं। कई बार तो इनकी संख्या में बढ़ोतरी भी हो रही है। बीमारी की चपेट में छोटे-छोटे बच्चों की संख्या ज्यादा है।
चिकित्सकों की मानें तो गर्मी के मौसम में लोगों को अपने खानपान की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए। भीषण गर्मी के दौरान खाने पीने में हुई थोड़ी सी भी चूक घातक बीमारी का कारण बन सकती है। गर्मी के मौसम में डायरिया, पीलिया, डी-हाइड्रेशन सहित कई बीमारियों के होने की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं। ऐसे रोग गंदे पानी की निकासी न होने, पीने के ढका न होने, बिना ढके खाने पर मंडराती मक्खियों, बासी खाना खाने आदि से हो सकते हैं। ऐसे मेें मरीज को उल्टियां, दस्त, बुखार जैसे रोग अपनी चपेट में ले लेते हैं। इनसे मरीज के शरीर में पानी की कमी होने से डी-हाइड्रेशन हो सकता है।
क्या कहते हैं शिशु विशेषज्ञ
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा ने कहा कि छोटे बच्चों में ऐसे वक्त शीघ्र ओआरएस यानी जीवन रक्षक घोल पिलाना चाहिए। यह घोल अपने घर पर भी तैयार किया जा सकता है। एक गिलास पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद उसमें एक चम्मच चीनी और थोड़ा नमक मिलाकर पिलाने से शरीर में हुई पानी की कमी को पूरा किया जा सकता है। इस घोल को दिन में थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाते रहें। उन्होंने परामर्श दिया कि इस मौसम मेें बासी खाना, तली हुई चीजों का खाने में कम प्रयोग करना, ज्यादा मसालेदार पदार्थ का कम प्रयोग कर हम काफी हद तक बीमारी को दूर भगाने में कामयाब रहते हैं।
भरी गर्मी में लू से बचने के लिए छाते, टोपी, चश्मा एवं रुमाल आदि का प्रयोग करना चाहिए। ऐसे मौसम में नींबू, प्याज, मौसमी, संतरा, शरबत एवं ताजे फलों के रस का अधिक प्रयोग करना चाहिए। ताजे एवं उबालकर ठंडे किए सादे पानी का ही ज्यादातर इस्तेमाल करना चाहिए।