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जिले में लगातार बारिश से हरी सब्जियों की खेती को नुकसान
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्वां नदी में जल स्तर बढ़ने के कारण किनारे में प्रवासी मजदूरों की फसल तबाद होना शुरू हो गई है। स्वा?
- फोटो : Una
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में बीते दिनों से हो रही बारिश के कारण स्वां नदी का जलस्तर भी बढ़ा है। इसका सीधा नुकसान स्वां नदी किनारे हो रही हरी सब्जियों की खेती को पहुंचा है। स्वां के किनारे बड़ी संख्या में प्रवासी लोग हरी सब्जियों की खेती करते हैं, लेकिन यह खेती नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले-पहले ही फायदे का सौदा साबित होती है।
जानकारी के अनुसार, जिले के मध्य से गुजरने वाली स्वां नदी के किनारों पर कई गांवों में प्रवासी मजदूर घीया, कद्दू, करेला, शिमला मिर्च, टमाटर जैसी हरी सब्जियों की खेती करते हैं। इसके अलावा यहां तरबूज और खीरा भी उगाया जाता है। खेती के लिए सिंचाई भी स्वां नदी से की जाती है। खास बात यह है कि ज्यादातर प्रवासी अपनी हरी सब्जियों को ऊना-धर्मशाला और ऊना-होशियारपुर हाईवे पर बेचते हैं। हिमाचल प्रदेश आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन सब्जियों की खरीद करते हैं।
इसकी एक मुख्य वजह यह भी है कि ये सब्जियां सीधी स्वां किनारे बने अस्थायी खेतों से लाई जाती हैं, लेकिन बरसात आते ही स्वां नदी के किनारे हरी सब्जियों की खेती पर खतरा मंडराने लगता है। क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के बाद स्वां नदी का जलस्तर बढ़ा है। ऐसे में पुराना होशियारपुर सड़क मार्ग के किनारे हरी सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अभी तक स्वां के जलस्तर ने अधिक खतरा पैदा नहीं किया है। अगर आने वाले दिनों में भारी बारिश होती है तो इससे सब्जियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
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स्वां नदी किनारे हरी सब्जियों की खेती प्रवासी लोगों के लिए आय का अच्छा स्रोत है। नदी किनारे लगाई जाने वाली सब्जियां फसल बीमा योजना के तहत नहीं आती। प्रवासी खेती को उस हिसाब से करते हैं कि बरसात से पहले अच्छी आय हो जाए और नुकसान कम से कम हो।
-रमेश लाल, जिला कृषि अधिकारी
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ऊना। जिले में बीते दिनों से हो रही बारिश के कारण स्वां नदी का जलस्तर भी बढ़ा है। इसका सीधा नुकसान स्वां नदी किनारे हो रही हरी सब्जियों की खेती को पहुंचा है। स्वां के किनारे बड़ी संख्या में प्रवासी लोग हरी सब्जियों की खेती करते हैं, लेकिन यह खेती नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले-पहले ही फायदे का सौदा साबित होती है।
जानकारी के अनुसार, जिले के मध्य से गुजरने वाली स्वां नदी के किनारों पर कई गांवों में प्रवासी मजदूर घीया, कद्दू, करेला, शिमला मिर्च, टमाटर जैसी हरी सब्जियों की खेती करते हैं। इसके अलावा यहां तरबूज और खीरा भी उगाया जाता है। खेती के लिए सिंचाई भी स्वां नदी से की जाती है। खास बात यह है कि ज्यादातर प्रवासी अपनी हरी सब्जियों को ऊना-धर्मशाला और ऊना-होशियारपुर हाईवे पर बेचते हैं। हिमाचल प्रदेश आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन सब्जियों की खरीद करते हैं।
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इसकी एक मुख्य वजह यह भी है कि ये सब्जियां सीधी स्वां किनारे बने अस्थायी खेतों से लाई जाती हैं, लेकिन बरसात आते ही स्वां नदी के किनारे हरी सब्जियों की खेती पर खतरा मंडराने लगता है। क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के बाद स्वां नदी का जलस्तर बढ़ा है। ऐसे में पुराना होशियारपुर सड़क मार्ग के किनारे हरी सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अभी तक स्वां के जलस्तर ने अधिक खतरा पैदा नहीं किया है। अगर आने वाले दिनों में भारी बारिश होती है तो इससे सब्जियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
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स्वां नदी किनारे हरी सब्जियों की खेती प्रवासी लोगों के लिए आय का अच्छा स्रोत है। नदी किनारे लगाई जाने वाली सब्जियां फसल बीमा योजना के तहत नहीं आती। प्रवासी खेती को उस हिसाब से करते हैं कि बरसात से पहले अच्छी आय हो जाए और नुकसान कम से कम हो।
-रमेश लाल, जिला कृषि अधिकारी