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एमएसपी कानून बनाने के लिए ऊना में निकाली रैली
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Kisaan morcha organises rally demanding MSP for farmers produce in Una
ऊना। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हिमाचल किसान सभा और सीटू ने ऊना के एमसी पार्क में एमएसपी पर कानून बनाने के समर्थन में रैली निकाली। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। इसके बाद डीसी के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा गया।
सीटू नेता गुरनाम सिंह व हिमाचल किसान सभा नेता रणजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह एलान कर दिया गया है कि तीनों किसान विरोधी काले कृषि कानून वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन अभी भी एमएसपी पर कानून बनना बाकी है। संयुक्त मोर्चे की यह मांग है कि लखीमपुर खीरी में हुए हत्याकांड में शामिल अभी भी अपने पद पर मौजूद हैं।
जबकि नैतिकता के आधार पर उन्हें इस्तीफा देना चाहिए था। कहा कि किसानों को दिल्ली की सरहद पर बैठे पूरा एक साल हो गया है। इस दौरान करीब 800 किसान शहीद हो गए हैं। इन किसानों को शहीद करार देकर उनके घर वालों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देनी चाहिए। अगर देश के प्रधानमंत्री तीनों काले कृषि कानून पहले ही वापस ले लेते तो उन किसानों की जान बच सकती थी। किसानों की मांग अनुसार फसलों का न्यूनतम खरीद मूल्य निर्धारित करके इसका कानून बनाना चाहिए।
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गुरनाम ने बताया कि एक तरफ किसान विरोधी कानून बनाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ मजदूरों की ओर से अनेक कुर्बानियां देकर अपने हक में बनवाए 44 कानूनों को खत्म करके पूंजीपतियों के पक्ष में चार लेबर कोड बनाए जा रहे हैं। इससे मजदूरों को इनके हक से वंचित किया जा रहा है। इसमें मजदूर अपने हकों की लड़ाई लड़ने के लिए न तो यूनियन बना सकेंगे और पूंजीपति फैक्टरी का मालिक जब चाहे फैक्ट्री को बंद करके मजदूरों को बाहर का रास्ता दिखा देगा।
मजदूर इसकी शिकायत अदालत में भी नहीं कर सकेगा। एक तरह से पूंजीपतियों के हाथों मजदूरों को बेचा जा रहा है, जिसे सीटू हरगिज भी होने नहीं देगी और सरकार की मंशा को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इस मौके पर नरेंद्र सिंह मजारा, केके राणा, राजिंद्र सिंह, उजागर सिंह, गुरमीत सिंह, गुरदीप सिंह, अशोक कुमार, जसवीर सिंह, अवतार सिंह, जरनैल सिंह व अन्य मौजूद रहे।
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सीटू नेता गुरनाम सिंह व हिमाचल किसान सभा नेता रणजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह एलान कर दिया गया है कि तीनों किसान विरोधी काले कृषि कानून वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन अभी भी एमएसपी पर कानून बनना बाकी है। संयुक्त मोर्चे की यह मांग है कि लखीमपुर खीरी में हुए हत्याकांड में शामिल अभी भी अपने पद पर मौजूद हैं।
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जबकि नैतिकता के आधार पर उन्हें इस्तीफा देना चाहिए था। कहा कि किसानों को दिल्ली की सरहद पर बैठे पूरा एक साल हो गया है। इस दौरान करीब 800 किसान शहीद हो गए हैं। इन किसानों को शहीद करार देकर उनके घर वालों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देनी चाहिए। अगर देश के प्रधानमंत्री तीनों काले कृषि कानून पहले ही वापस ले लेते तो उन किसानों की जान बच सकती थी। किसानों की मांग अनुसार फसलों का न्यूनतम खरीद मूल्य निर्धारित करके इसका कानून बनाना चाहिए।
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गुरनाम ने बताया कि एक तरफ किसान विरोधी कानून बनाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ मजदूरों की ओर से अनेक कुर्बानियां देकर अपने हक में बनवाए 44 कानूनों को खत्म करके पूंजीपतियों के पक्ष में चार लेबर कोड बनाए जा रहे हैं। इससे मजदूरों को इनके हक से वंचित किया जा रहा है। इसमें मजदूर अपने हकों की लड़ाई लड़ने के लिए न तो यूनियन बना सकेंगे और पूंजीपति फैक्टरी का मालिक जब चाहे फैक्ट्री को बंद करके मजदूरों को बाहर का रास्ता दिखा देगा।
मजदूर इसकी शिकायत अदालत में भी नहीं कर सकेगा। एक तरह से पूंजीपतियों के हाथों मजदूरों को बेचा जा रहा है, जिसे सीटू हरगिज भी होने नहीं देगी और सरकार की मंशा को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इस मौके पर नरेंद्र सिंह मजारा, केके राणा, राजिंद्र सिंह, उजागर सिंह, गुरमीत सिंह, गुरदीप सिंह, अशोक कुमार, जसवीर सिंह, अवतार सिंह, जरनैल सिंह व अन्य मौजूद रहे।