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Una News: ग्राम पंचायत खरयालता के प्रधान राकेश धीमान निलंबित
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मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप
पंचायत से संबंधित चल-अचल संपत्ति और अभिलेख ग्राम पंचायत सचिव को सौंपने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा क्षेत्र की ग्राम पंचायत खरयालता के प्रधान राकेश धीमान को जिला पंचायत अधिकारी ऊना की ओर से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत किए गए विकासात्मक कार्यों में अनियमितताओं के चलते की गई है। स्थानीय निवासी अमन ठाकुर की ओर से उपायुक्त कार्यालय को की गई शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच खंड विकास अधिकारी बंगाणा सुशील कुमार ने की। जांच में आरोपों की पुष्टि के संकेत मिले। इसके पश्चात राकेश धीमान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उनके उत्तर को असंतोषजनक पाते हुए आगे की जांच में हस्तक्षेप की आशंका को देखते हुए उन्हें निलंबित किया गया है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 145(2) एवं सामान्य नियम, 1997 के नियम 142 के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है। निलंबन आदेश में निर्देश दिए गए हैं कि राकेश धीमान तत्काल प्रभाव से प्रधान पद की मोहर, पंचायत से संबंधित चल-अचल संपत्ति एवं अभिलेख ग्राम पंचायत सचिव को सौंपें। यह मामला अब आगामी जांच के अधीन रहेगा। पंचायत में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जनहित में उठाया गया है। जिला पंचायत अधिकारी सरवण कुमार ने खबर की पुष्टि की है।
बॉक्स
राजनीतिक षड्यंत्र से हुआ मेरा निलंबन : धीमान
राकेश धीमान ने निलंबन को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित षड्यंत्र बताया और भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को सिरे से नकारा। उनका कहना है कि पंचायत की विकास योजनाओं की जिम्मेदारी केवल प्रधान की नहीं होती। पंचायत सचिव की लिखित जवाबदेही होती है। ऐसे में केवल प्रधान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना साफ तौर पर व्यक्तिगत और राजनीतिक द्वेष का परिणाम है।
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पंचायत से संबंधित चल-अचल संपत्ति और अभिलेख ग्राम पंचायत सचिव को सौंपने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा क्षेत्र की ग्राम पंचायत खरयालता के प्रधान राकेश धीमान को जिला पंचायत अधिकारी ऊना की ओर से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत किए गए विकासात्मक कार्यों में अनियमितताओं के चलते की गई है। स्थानीय निवासी अमन ठाकुर की ओर से उपायुक्त कार्यालय को की गई शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच खंड विकास अधिकारी बंगाणा सुशील कुमार ने की। जांच में आरोपों की पुष्टि के संकेत मिले। इसके पश्चात राकेश धीमान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उनके उत्तर को असंतोषजनक पाते हुए आगे की जांच में हस्तक्षेप की आशंका को देखते हुए उन्हें निलंबित किया गया है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 145(2) एवं सामान्य नियम, 1997 के नियम 142 के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है। निलंबन आदेश में निर्देश दिए गए हैं कि राकेश धीमान तत्काल प्रभाव से प्रधान पद की मोहर, पंचायत से संबंधित चल-अचल संपत्ति एवं अभिलेख ग्राम पंचायत सचिव को सौंपें। यह मामला अब आगामी जांच के अधीन रहेगा। पंचायत में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जनहित में उठाया गया है। जिला पंचायत अधिकारी सरवण कुमार ने खबर की पुष्टि की है।
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राजनीतिक षड्यंत्र से हुआ मेरा निलंबन : धीमान
राकेश धीमान ने निलंबन को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित षड्यंत्र बताया और भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को सिरे से नकारा। उनका कहना है कि पंचायत की विकास योजनाओं की जिम्मेदारी केवल प्रधान की नहीं होती। पंचायत सचिव की लिखित जवाबदेही होती है। ऐसे में केवल प्रधान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना साफ तौर पर व्यक्तिगत और राजनीतिक द्वेष का परिणाम है।
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