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Una News: मक्की की फसल पर फाल आर्मी वर्म का प्रकोप, किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
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अरलू पंचायत के किसानों ने फसल को बचाने की लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। विकास खंड बंगाणा की ग्राम पंचायत अरलू के किसानों की मेहनत पर सुंडी (फाल आर्मी वर्म) का प्रकोप बढ़ गया है। यहां मक्की की फसल पर कीट सुंडी का व्यापक हमला हो गया है। फसल को भारी नुकसान पहुंच रहा है। सुंडी पौधों की हरी पत्तियों को तेजी से चट कर रही है। इससे पौधों की बढ़त रुक गई है और उपज पर संकट मंडरा रहा है। किसान पंकज उपमन्यु, ब्रजेश कुमार और मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने बड़ी मेहनत से मक्की की बुआई की थी। इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी लेकिन सुंडी के हमले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यदि समय रहते कीटनाशक का छिड़काव नहीं हुआ तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी। किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द एक विशेषज्ञ की टीम गांव में भेजी जाए, जो फसल का निरीक्षण करे और आवश्यक कीटनाशकों का छिड़काव करवाए, ताकि नुकसान को रोका जा सके। इस संदर्भ में कृषि विभाग के अधिकारी सतपाल धीमान ने बताया कि विभाग को किसानों की समस्या की सूचना मिल चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विशेषज्ञों की एक टीम शीघ्र ही अरलू पंचायत का दौरा करेगी और फसल के निरीक्षण के बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
बाक्स
कैसे बचाएं मक्की की फसल को
कृषि विषयबाद विशेषज्ञ डॉ. बलवंत वर्मा ने बताया कि फसल की नियमित निगरानी करें ताकि शुरुआती स्तर पर ही कीटों का पता चल सके। नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का उपयोग सुंडी नियंत्रण के लिए फायदेमंद हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार क्लोरपायरीफॉस, थायोमेथोक्सम या स्पाइनोसेड जैसे अनुमोदित कीटनाशकों का उपयोग करें। मादा सुंडी को आकर्षित कर पकड़ने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाना एक कारगर तरीका हो सकता है। एक ही खेत में बार-बार मक्की की खेती करने से कीटों की संख्या बढ़ती है। इसलिए फसल चक्र बदलते रहें। खेत में अतिरिक्त घास-फूस और खरपतवार हटा दें, जो कीटों के छिपने का स्थान बनती हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। विकास खंड बंगाणा की ग्राम पंचायत अरलू के किसानों की मेहनत पर सुंडी (फाल आर्मी वर्म) का प्रकोप बढ़ गया है। यहां मक्की की फसल पर कीट सुंडी का व्यापक हमला हो गया है। फसल को भारी नुकसान पहुंच रहा है। सुंडी पौधों की हरी पत्तियों को तेजी से चट कर रही है। इससे पौधों की बढ़त रुक गई है और उपज पर संकट मंडरा रहा है। किसान पंकज उपमन्यु, ब्रजेश कुमार और मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने बड़ी मेहनत से मक्की की बुआई की थी। इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी लेकिन सुंडी के हमले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यदि समय रहते कीटनाशक का छिड़काव नहीं हुआ तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी। किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द एक विशेषज्ञ की टीम गांव में भेजी जाए, जो फसल का निरीक्षण करे और आवश्यक कीटनाशकों का छिड़काव करवाए, ताकि नुकसान को रोका जा सके। इस संदर्भ में कृषि विभाग के अधिकारी सतपाल धीमान ने बताया कि विभाग को किसानों की समस्या की सूचना मिल चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विशेषज्ञों की एक टीम शीघ्र ही अरलू पंचायत का दौरा करेगी और फसल के निरीक्षण के बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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कैसे बचाएं मक्की की फसल को
कृषि विषयबाद विशेषज्ञ डॉ. बलवंत वर्मा ने बताया कि फसल की नियमित निगरानी करें ताकि शुरुआती स्तर पर ही कीटों का पता चल सके। नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का उपयोग सुंडी नियंत्रण के लिए फायदेमंद हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार क्लोरपायरीफॉस, थायोमेथोक्सम या स्पाइनोसेड जैसे अनुमोदित कीटनाशकों का उपयोग करें। मादा सुंडी को आकर्षित कर पकड़ने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाना एक कारगर तरीका हो सकता है। एक ही खेत में बार-बार मक्की की खेती करने से कीटों की संख्या बढ़ती है। इसलिए फसल चक्र बदलते रहें। खेत में अतिरिक्त घास-फूस और खरपतवार हटा दें, जो कीटों के छिपने का स्थान बनती हैं।
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