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Una News: पेखूबेला सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट गेट के बाहर कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन

Mon, 04 Aug 2025 12:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:55 PM IST
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Employees stage protest outside Pekhubela Solar Energy Project gate
सोलर पावर प्रोजेक्ट पेखुबेला के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर भाजपा पदाधिकारियों के साथ धरने पर - फोटो : संवाद
प्रबंधन के खिलाफ जमकर लगाए मुर्दाबाद के नारे
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तीन महीने से नहीं मिल रहा कर्मचारियों को वेतन
बारिश के पानी में डूबा सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट, कोई नहीं ले रहा सुध
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। पेखूबेला में 220 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित 32 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना फिर विवादों में आ गई है। परियोजना गेट के बाहर रविवार को कर्मचारियों ने भाजपा पदाधिकारियों के साथ मिलकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने तीन माह से वेतन न मिलने और परियोजना में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परियोजना के शुरू होने से पहले स्थानीय लोगों को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्तमान में यहां कार्यरत लगभग 26 कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारी लगातार हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से उनकी कोई सुध नहीं ली जा रही है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने बताया कि हालिया भारी बारिश के चलते सौर ऊर्जा परियोजना परिसर जलमग्न हो गया है। अनुमान है कि इस जलभराव से प्रोजेक्ट को करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कर्मचारियों को अब बोट (नाव) के सहारे परिसर में प्रवेश करना पड़ रहा है। धरने में भाजपा के जिला प्रवक्ता विनय शर्मा, मंडलाध्यक्ष राहुल देव शर्मा, महामंत्री परमिंद्र सिंह, नरेंद्र ठाकुर, युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जसविंद्र सिंह सहित कई कार्यकर्ता शामिल हुए। भाजपा प्रवक्ता विनय शर्मा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सौर परियोजना की लागत में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इसी भ्रष्टाचार के चलते एक उच्च अधिकारी की आत्महत्या तक हो चुकी है, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। उन्होंने बताया कि ऊना के विधायक सतपाल सत्ती ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया है और इसे एक बड़ा भ्रष्टाचार करार दिया है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्थापित इस परियोजना के बुनियादी ढांचे में भारी खामियां हैं, जिससे बारिश के समय यह प्रोजेक्ट जलभराव की चपेट में आ गया। इसके विपरीत भाजपा सरकार में स्थापित इंडियन ऑयल डिपो को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
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भविष्य में भी विरोध जारी रखने की चेतावनी
भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे और समय-समय पर आवाज उठाते रहेंगे।
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