फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   cloth buisnessmen are angry on vat

वैट वापस न लिया तो सड़क पर उतरेंगे कारोबारी

Mon, 23 May 2016 10:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मैहतपुर
ब्यूरो/अमर उजाला/मैहतपुर Updated Mon, 23 May 2016 10:58 PM IST
विज्ञापन
cloth buisnessmen are angry on vat
11 मई को एचआरटीसी कर्मचारी गेट मीटिंग कर कार्यालय के प्रांगण में धरना-प्रदर्शन करेंगे।

राज्य के स्वर्णकारों के विरोध के बाद अब प्रदेश के कपड़ा व्यापारियों ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कपड़ा कारोबारियों ने दो टूक कहा है कि सरकार ने अब कफन के टुकड़े पर भी टैक्स लगा दिया है। अगर राज्य सरकार ने कपड़े पर लगाए गए वैट को वापस नहीं लिया तो सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जताएंगे। सोमवार को मैहतपुर के कपड़ा व्यापारियों की बैठक में राज्य सरकार के तुगलकी फरमान का जोरदार ढंग से विरोध दर्ज करवाया गया।

विज्ञापन


कहा गया कि सरकार व्यापारियों को तंग करने के लिए इस तरह के फरमान जारी कर रही है। इन लोगों का साफ कहना है कि कारोबार जगत से जुड़ा निर्णय लेने से पूर्व राज्य के कारोबारियों की राय नहीं ली गई और न ही उनकी दिक्कतों को समझा गया। व्यापार मंडल के महासचिव संजीव सचदेवा ने कहा कि ऑनलाइन शॉपिंग से बाजारों में बैठे दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, ऊपर से सरकार ने वैट लगाकर रही-सही कसर पूरी कर दी है। व्यापारी वर्ग पहले ही अपने कारोबार में सरकार को टैक्स अदा कर रहा है, बावजूद इसके सरकार ने पांच फीसदी कपड़े पर वैट लगाकर कपड़ा कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बेशक वैट का असर आम जनता पर ही पड़ेगा, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। सचदेवा के मुताबिक कपड़ा कारोबारी डेड स्टॉक, उधारी तथा मेन पावर की कमी जैसी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। ऐसे में क्या राज्य सरकार डेड स्टॉक का मुआवजा अदा करने को राजी है? फैशन के बदलते युग में कपड़ा व्यापारियों का बहुत सा कपड़ा तो डेड स्टॉक में ही चला जाता है, जिसका घाटा पूरा नहीं हो पाता। बैठक में कपड़ा व्यापारियों ने राज्य सरकार से जानना चाहा है कि जब सरकार छोटी-छोटी चीजों पर टैक्स लगा जनता पर बोझ लाद रही है, तो ऐसे में मंत्रियों तथा विधायकों को टैक्स में छूट क्यों? उन्होंने कहा कि नेताओं को मिलने वाली निशुल्क सुविधाओं को भी बंद किया जाना चाहिए। इस मौके पर संजीव कुमार, दीपक मनोचा, अशोक कुमार, गुरदयाल सिंह, सुशील कुमार, मनीष, विचित्र सिंह, अंबा प्रसाद, गुलशन, उर्मिला, रामकुमार, रवीश ठाकुर, लक्की कमल समेत कई कारोबारियों ने अपना विरोध दर्ज करवाया। कपड़ा कारोबार से कंबल, चादरों, तौलिए, शालों, तकिया कवर आदि पर पहले ही सी टैक्स लागू है। अब बिना सिले कपड़े पर वैट लग जाने से कपड़ा कारोबारी विरोध प्रकट कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed