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कोरोना ने तोड़ी 85 साल पुरानी परंपरा, ट्रैक्टर पर निकाली पालकी
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संतोषगढ़ नगर में दुर्गाष्टमी पर निकली माता एवं भैरव नाथ की भव्य झांकी व दर्शन करने को उमड़ा श्रद्
- फोटो : Una
संतोषगढ़ (ऊना)। दुर्गाष्टमी पर संतोषगढ़ नगर में शुक्रवार को 85 साल से कंधों पर निकाली जाने वाली मां दुर्गा और भैरव नाथ की पालकी यात्रा की परंपरा कोरोना के चलते टूट गई। पहली बार ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लोगों ने शोभायात्रा प्राचीन पालकी (देवरथ) से निकाली। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता और भैरवनाथ की आरती भी उतारी। इस दौरान उमड़ी भीड़ ने मां और बाबा भैरवनाथ के जयकारे भी लगाए ।
शुक्रवार को नगर में सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शोभायात्रा ट्रैक्टर ट्रॉली पर ही निकाली गई। हालांकि, इस बार कोरोना के डर से काफी कम संख्या में श्रद्धालु झांकी के वक्त उपस्थित रहे। मां दुर्गा और भैरव नाथ की प्राचीन झांकी को देखने के लिए जुटे श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी कम रही। झांकी के दौरान कोविड-19 के लिए तय नियमों व सोशल डिस्टनसिंग की भी लोगों ने परवाह नहीं की। झांकी शाम को करीब साढ़े पांच बजे नगर में ब्रह्मानंद की बैठक से शुरू होकर मेन बाजार से गुजरते हुए गोशाला चौक, वीरभद्र चौक से होते हुए वापिस अपने गंतव्य पर पहुंची। जहां पर श्रद्धालुओं ने आरती के साथ झांकी को विश्राम दिया।
नगर के लोगों में रामकृष्ण, अजय कुमार, सुरेश कुमार, विवेक कुमार, रमेश चंद, राहुल, अंकुश, सन्नी का कहना है कि पिछले कई दशकों से दुर्गा अष्टमी मनाने की परंपरा से चली आ रही है। जिसे आज भी लोग बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इन लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से इस साल लोगों को वर्षों पुरानी परंपरा को छोड़ कर मां की पालकी कंधों की बजाए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर निकलना पड़ रहा है।
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शुक्रवार को नगर में सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शोभायात्रा ट्रैक्टर ट्रॉली पर ही निकाली गई। हालांकि, इस बार कोरोना के डर से काफी कम संख्या में श्रद्धालु झांकी के वक्त उपस्थित रहे। मां दुर्गा और भैरव नाथ की प्राचीन झांकी को देखने के लिए जुटे श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी कम रही। झांकी के दौरान कोविड-19 के लिए तय नियमों व सोशल डिस्टनसिंग की भी लोगों ने परवाह नहीं की। झांकी शाम को करीब साढ़े पांच बजे नगर में ब्रह्मानंद की बैठक से शुरू होकर मेन बाजार से गुजरते हुए गोशाला चौक, वीरभद्र चौक से होते हुए वापिस अपने गंतव्य पर पहुंची। जहां पर श्रद्धालुओं ने आरती के साथ झांकी को विश्राम दिया।
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नगर के लोगों में रामकृष्ण, अजय कुमार, सुरेश कुमार, विवेक कुमार, रमेश चंद, राहुल, अंकुश, सन्नी का कहना है कि पिछले कई दशकों से दुर्गा अष्टमी मनाने की परंपरा से चली आ रही है। जिसे आज भी लोग बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इन लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से इस साल लोगों को वर्षों पुरानी परंपरा को छोड़ कर मां की पालकी कंधों की बजाए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर निकलना पड़ रहा है।
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