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Una News: चैंपियन बेटे को गले लगाकर छलक उठीं मां की आंखें, खीर खिलाकर किया स्वागत

Wed, 28 Oct 2026 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Wed, 28 Oct 2026 11:54 PM IST
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A mothers eyes welled up with tears as she embraced her champion son
अंब (ऊना)। जिस बेटे के भविष्य की चिंता में कभी मां पुष्पा देवी की आंखें नम हो जाती थीं, आज उसी चैंपियन बेटे को गले लगाते हुए उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पैरा एशियन गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीतकर लौटे निषाद कुमार ने हिमाचल की सीमा मैहतपुर पहुंचते ही मां के पैर छुए तो उन्होंने बेटे को बाहों में भर लिया। अपने हाथों से बनाई पसंदीदा खीर खिलाकर उसका मुंह मीठा कराया। यह पल एक मां की बरसों की चिंता, संघर्ष और अटूट विश्वास के सुखद परिणाम का गवाह बना।
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बचपन में एक हादसे में हाथ गंवाने के बाद निषाद के भविष्य को लेकर मां के मन में कई सवाल थे। साधारण परिवार और सीमित संसाधनों के बीच मां को चिंता सताती थी कि बेटा आगे कैसे बढ़ेगा और अपने पैरों पर कैसे खड़ा होगा। लेकिन निषाद ने अपनी शारीरिक चुनौती को कमजोरी नहीं बनने दिया। घर के पास लकड़ी के पोल गाड़कर ऊंची कूद का अभ्यास शुरू किया। कई बार शरारती तत्व उसके अभ्यास के लिए लगाए गए लकड़ी के खंभे तोड़ देते थे। ऐसे में निराश होकर घर लौटने वाले बेटे को मां ही हौसला देती और दोबारा उठकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी। पिता रछपाल सिंह की मेहनत और मां पुष्पा देवी के विश्वास ने निषाद के हौसले को कभी टूटने नहीं दिया। आज उसी संघर्ष ने सफलता की ऐसी इबारत लिखी है कि निषाद दोहरे स्वर्ण पदक के साथ देश का गौरव बनकर घर लौटे हैं। उनकी उपलब्धि पर परिवार ही नहीं, पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
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अंब से गांव बदाऊं तक हुआ भव्य स्वागत
निषाद कुमार के अंब पहुंचने पर एसडीएम अंब ने शॉल और टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया और उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। भाजपा के पूर्व विधायक बलबीर सिंह और गगरेट के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा ने भी उनका अभिनंदन किया। गांव बदाऊं में अंदौरा स्कूल के पास बच्चों ने फूलमालाओं और तिलक के साथ निषाद का स्वागत किया। प्रशंसकों ने स्वागत के लिए भंगड़ा टीम और डीजे की व्यवस्था भी की थी।
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घर जाने से पहले निषाद परिवार और कोच नसीम अहमद के साथ गांव के श्रीकृष्ण मंदिर पहुंचे और भगवान का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने गांव के बुजुर्गों से भी आशीर्वाद लिया। बहन रमा देवी ने माथे पर तिलक लगाकर भाई का स्वागत किया। गांव में उत्साह और खुशी का माहौल रहा। निषाद की सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि मजबूत हौसले, परिवार के साथ और लगातार मेहनत से मुश्किलों को पीछे छोड़कर नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।
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