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नशों की गर्त में जा रहा युवा वर्ग

Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
Una
Una Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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ऊना। आजकल स्कूल जाने वाले कम आयु वाले बच्चों विशेषकर युवा वर्ग नशों से बुरी तरह प्रभावित हैं। दुर्भाग्य है कि आजकल नौजवान शराब और धूम्रपान को फैशन और शौक के चक्कर में अपना रहे हैं। फ्लूड, गांजा, तंबाकू, भांग, कॉफी और कई प्रकार के दर्द हारी बाम सहित हर प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन जानलेवा हो सकता है। नशामुक्ति के लिए 30 जनवरी को नशामुक्ति संकल्प और शपथ दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 31 मई अंतर्राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस, 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस, 2 से 8 अक्टूबर तक मद्यनिषेध सप्ताह और 18 दिसंबर को मद्यनिषेध दिवस के रूप में मना कर महज औपचारिक ता पूरी की जा रही है। जानकारों ने सलाह दी है कि अभिभावक भी अपने बच्चों पर कड़ी निगाह रखें।
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कैसे बचाएं बच्चों को नशे से:-
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पूर्व प्रधानाचार्य रविंद्र नाथ पाठक, प्रधानाचार्य राजेंद्र कौशल, पवन शर्मा, धीरज शर्मा सहित कई बुद्धिजीवी लोगों ने अपने बच्चों पर निगाह रखने एवं बच्चोें में आए बदलाव पर ध्यान देने की हिदायत देते हुए कहा कि यदि बच्चों में अचानक बदलाव आता है। खाना खाने से मना करते हैं, आंखों में लाली और सूजन रहती है या बच्चे के स्वभाव में परिवर्तन जैसे कि नाराज होना, गुस्सा करना, चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना, बार-बार पैसे की मांग करना, पढ़ाई में मन न लगना, एकांत पसंद करना जैसे लक्षण दिखें तो समझ लें कि बच्चा या तो मानसिक तनाव में है या नशे का शिकार हो चुका है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को न डांटते हुए उनसे दोस्तों जैसा व्यवहार करना चाहिए। बच्चों के साथ समय बिताएं। उनकी भावनाओं को समझें और उनके साथ खुलकर बातें करें।
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क्या हैं नशे के दुष्परिणाम:-
डा. अनीता शर्मा का कहना है कि शराब के सेवन से पेट और लीवर खराब होते हैं। इससे मुंह में छाले पड़ सकते हैं और पेट का कैंसर भी हो सकता है। इसी तरह गांजा और भांग जैसे पदार्थ इंसान के दिमाग पर बुरा असर डालते हैं। यह चिंतनीय है कि जब से बाजार में गुटखा पाउच का प्रचलन बढ़ा है तब से नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। फ्लूड, भांग, कोकीन, चरस, अफीम ऐसे उत्तेजना लाने वाले नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में हो जाता है।
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