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Una News: टेंडर की सख्त शर्तों में उलझी 97 करोड़ रुपये की कमांड एरिया डेवलपमेंट योजना
Thu, 09 Jul 2026 12:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:09 AM IST
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ऊना। किसानों तक सिंचाई परियोजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रस्तावित करीब 97 करोड़ रुपये की मॉर्डनाइजेशन कमांड एरिया डेवलपमेंट (एमसीएडी) योजना फिलहाल टेंडर की सख्त शर्तों में उलझ गई है। पहली बार जारी की गई निविदा प्रक्रिया में एक भी ठेकेदार ने भाग नहीं लिया।
निर्माण एजेंसियां निर्धारित तकनीकी और वित्तीय पात्रता शर्तों को पूरा नहीं कर सकीं। इसके बाद जल शक्ति विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर निविदा की शर्तों में संशोधन का मांग की।
जल शक्ति विभाग ने योजना के कार्यों में देरी न हो, इसके लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना का उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाना, खेतों तक पानी की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना तथा जल उपयोग दक्षता बढ़ाना है।
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हालांकि पहली निविदा में रखी गई पात्रता शर्तें इतनी कड़ी थीं कि कोई भी ठेकेदार प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ। जल शक्ति विभाग ने इस पूरे मामले से केंद्र सरकार को अवगत कराते हुए सुझाव दिया है कि पात्रता संबंधी कुछ शर्तों में व्यावहारिक संशोधन किया जाए, ताकि अधिक निर्माण एजेंसियां निविदा में भाग ले सकें और प्रतिस्पर्धा बढ़े।
बता दें कि कि 97 करोड़ रुपये की यह योजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। योजना के तहत नहरों के आधुनिकीकरण, जल वितरण प्रणाली को मजबूत करने, पानी की बर्बादी रोकने और खेतों तक अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने पर जोर रहेगा।
इससे हजारों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है और खेती की उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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निर्माण एजेंसियां निर्धारित तकनीकी और वित्तीय पात्रता शर्तों को पूरा नहीं कर सकीं। इसके बाद जल शक्ति विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर निविदा की शर्तों में संशोधन का मांग की।
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जल शक्ति विभाग ने योजना के कार्यों में देरी न हो, इसके लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना का उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाना, खेतों तक पानी की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना तथा जल उपयोग दक्षता बढ़ाना है।
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हालांकि पहली निविदा में रखी गई पात्रता शर्तें इतनी कड़ी थीं कि कोई भी ठेकेदार प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ। जल शक्ति विभाग ने इस पूरे मामले से केंद्र सरकार को अवगत कराते हुए सुझाव दिया है कि पात्रता संबंधी कुछ शर्तों में व्यावहारिक संशोधन किया जाए, ताकि अधिक निर्माण एजेंसियां निविदा में भाग ले सकें और प्रतिस्पर्धा बढ़े।
बता दें कि कि 97 करोड़ रुपये की यह योजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। योजना के तहत नहरों के आधुनिकीकरण, जल वितरण प्रणाली को मजबूत करने, पानी की बर्बादी रोकने और खेतों तक अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने पर जोर रहेगा।
इससे हजारों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है और खेती की उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।