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Himachal Pradesh: चंद्रा नदी को ब्यास नदी में मिलाने की अटकलें तेज, 50 फीसदी कम होगा चिनाब का जलस्तर; जानें

Wed, 07 May 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 07 May 2025 05:00 AM IST
सार

लाहौल से गुजरने वाली चंद्रभागा नदी भी सिंधु नदी में मिलकर पाकिस्तान जाती है। ऐसे में नदी का पानी पाकिस्तान न जाए, इसके लिए चंद्रा नदी को ब्यास नदी में मोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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Speculations are rife about merging Chandra river with Beas river Chenab will decrease by 50 percent
चंद्रभाग नदी के संगम स्थल तांदी का नजारा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सिंधु जल संधि निलंबित करने के बाद पाकिस्तान को जाने वाली नदियों का पानी रोकने की कवायद केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है। लाहौल से गुजरने वाली चंद्रभागा नदी भी सिंधु नदी में मिलकर पाकिस्तान जाती है। ऐसे में नदी का पानी पाकिस्तान न जाए, इसके लिए चंद्रा नदी को ब्यास नदी में मोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसे लेकर कुल्लू से लेकर लाहौल तक चर्चाएं हैं। विशेषज्ञों का मामना है कि आधुनिक तकनीक के दौर में नदी को मोड़ना बड़ी चुनौती नहीं है।

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जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के कुंजम दर्रा से होकर जाने वाले ट्रैक पर 14,000 फीट ऊंची चंद्रताल झील से निकलने वाली चंद्रा नदी को डायवर्ट कर ब्यास में लाने की अटकलें हैं। इस योजना से चिनाब नदी का पानी 40 से 50 फीसदी कम होगा। इसे जम्मू-कश्मीर में पड़ने वाले बांधों में रोकना आसान होगा। जिला कुल्लू से लेकर लाहौल के लोगों का कहना है कि चंद्रा नदी को आसानी से ब्यास में मिलाकर पाकिस्तान को झटका दिया जा सकता है। इस योजना को टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से धरातल पर उतारा जा सकता है।
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60 के दशक में ब्यास नदी को मोड़कर सलापड़ में सतलुज नदी में मिलाया गया। आज टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) जैसी तकनीक है। इससे चंद्रा नदी को आसानी से टनल के माध्यम से मोड़ा जा सकता है। आधुनिकता के दौर में इस तरह के कामों को आसानी से अंजाम दिया जा सकता है। - बीएस राणा, सेवानिवृत्त मुख्य अरण्यपाल वन विभाग।

चंद्रा नदी के पानी को ब्यास मेंं लाना कोई बड़ी चुनौती नहीं है। चंद्रा नदी का पानी ब्यास में लाया जा सकता है। इस योजना से चिनाब का जलस्तर भी आधा रह जाएगा। आधुनिक तकनीक की दुनिया में यह मुश्किल नहीं है। - देवेश शर्मा, सेवानिवृत अधीक्षक अभियंता जलशक्ति विभाग।

सिंधु जल संधि निलंबित होने से पाकिस्तान को पानी नहीं भेजा जाएगा। चंद्रा नदी को ब्यास में मिलाने की इस योजना के बारे में विचार किया जा सकता है- गोविंद सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री।
 
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