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धरती पर जब भी पाप बढ़ा तो भगवान ने लिया अवतार : साध्वी संयोगिता
Sun, 25 Feb 2024 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 25 Feb 2024 11:29 PM IST
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बददी में राम कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद
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अमरावती में पांच दिवसीय श्री राम कथा शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। बद्दी के अमरावती अपार्टमेंट स्थित मंदिर परिसर में पांच दिवसीय श्रीराम कथा शुरू हुई। जिसमें साध्वी संयोगिता भारती ने कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब-जब भी इस धरा पर पाप बढ़ता है और धर्म की हानि होती है तब-तब ईश्वरीय शक्ति अवतार धारण करती है। मानवीय जीवन में दैवीय गुण स्थापित कर संपूर्ण जड़ता को समाप्त करने के लिए एवं दैवीय प्रेम के अर्थो को स्थापित करने के लिए वो सर्वशक्तिमान परमात्मा निर्गुण से सगुण रूप धारण कर इस धरा पर आते हैं।
इसी प्रकार जब त्रेतायुग में रावण का अत्याचार बढ़ गया था तब प्रभु श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार धारण करते हैं। लेकिन विचार करने योग्य बात यह है कि जब ईश्वर धरती पर अवतार धारण करके आता है तो कितने लोग उसे पहचान पाते हैं। प्रभु के साथ रहने वाली माता कैकेयी, मंथरा उन्हें पहचान नहीं पाई। रावण ने जब प्रभु को देखा उन्हें वनवासी कहकर संबोधित किया। लेकिन माता शबरी ने प्रभु श्री राम को प्रथम भेंट में ही पहचान लिया था। यह दिव्य चक्षु केवल एक पूर्ण सतगुरु ही प्रदान कर सकता है। इसलिए जीवन में एक पूर्ण सतगुरु की जरूरत है जो ऐसा नेत्र प्रदान करे जिससे हम ईश्वर को घट में देख सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। बद्दी के अमरावती अपार्टमेंट स्थित मंदिर परिसर में पांच दिवसीय श्रीराम कथा शुरू हुई। जिसमें साध्वी संयोगिता भारती ने कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब-जब भी इस धरा पर पाप बढ़ता है और धर्म की हानि होती है तब-तब ईश्वरीय शक्ति अवतार धारण करती है। मानवीय जीवन में दैवीय गुण स्थापित कर संपूर्ण जड़ता को समाप्त करने के लिए एवं दैवीय प्रेम के अर्थो को स्थापित करने के लिए वो सर्वशक्तिमान परमात्मा निर्गुण से सगुण रूप धारण कर इस धरा पर आते हैं।
इसी प्रकार जब त्रेतायुग में रावण का अत्याचार बढ़ गया था तब प्रभु श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार धारण करते हैं। लेकिन विचार करने योग्य बात यह है कि जब ईश्वर धरती पर अवतार धारण करके आता है तो कितने लोग उसे पहचान पाते हैं। प्रभु के साथ रहने वाली माता कैकेयी, मंथरा उन्हें पहचान नहीं पाई। रावण ने जब प्रभु को देखा उन्हें वनवासी कहकर संबोधित किया। लेकिन माता शबरी ने प्रभु श्री राम को प्रथम भेंट में ही पहचान लिया था। यह दिव्य चक्षु केवल एक पूर्ण सतगुरु ही प्रदान कर सकता है। इसलिए जीवन में एक पूर्ण सतगुरु की जरूरत है जो ऐसा नेत्र प्रदान करे जिससे हम ईश्वर को घट में देख सके।
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