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Solan News: टमाटर चार रुपये किलो, किसान की लागत भी नहीं निकल रही

Tue, 04 Aug 2026 11:53 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:53 PM IST
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Tomatoes are selling at four rupees a kilo; farmers aren't even recovering their production costs.
सोलन सब्जी मंडी में मंगलवार को पहुंची टमाटर की खेप। संवाद
मंडी में 14 रुपये तक दाम; स्प्रे का खर्च आमदनी से दोगुने से अधिक,किसानों ने देखरेख तक छोड़ी
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बाहरी राज्यों से भारी आवक के चलते दाम में गिरावट, किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
नासिक और बंगलुरु से टमाटर की भारी आवक से नहीं मिल पा रहे दाम
2.61 लाख क्रेट पहुंच चुके, रोज 8 हजार क्रेट की आवक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश के किसान टमाटर के गिरते दामों के कारण गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कड़ी मेहनत और भारी लागत से तैयार फसल घाटे का सौदा बन गई है। स्थिति यह है कि सब्जी मंडी में टमाटर बेचकर लागत निकालना तो दूर, फसल पर किए जाने वाले कीटनाशक और फफूंदनाशक के छिड़काव का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। आमदनी की तुलना में स्प्रे का खर्च दोगुने से अधिक बैठ रहा है। इससे निराश कई किसानों ने फसल की देखरेख और छिड़काव तक बंद कर दिया है।
सोलन सब्जी मंडी में इन दिनों टमाटर 4 से 14 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। सिरमौर और सोलन जिलों के हजारों किसानों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से टमाटर और शिमला मिर्च की खेती पर निर्भर है। मौजूदा सीजन में मिल रहे कम दामों ने किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। किसान हरीदत्त, प्रेम चंद, देवी चंद, मनीष, राजेंद्र, देवदत्त और मनोज समेत कई उत्पादकों ने बताया कि मंडी में मिल रही कीमत से खेत से मंडी तक फसल पहुंचाने की मजदूरी और ढुलाई का खर्च भी पूरा नहीं हो रहा है।
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बाहरी राज्यों से भारी आवक बनी मुख्य वजह
मंडी समिति सोलन के सचिव राघव सूद के अनुसार सोलन सब्जी मंडी में अब तक टमाटर की करीब 2,61,054 क्रेट पहुंच चुके हैं। रोजाना औसतन 8,000 क्रेट टमाटर मंडी पहुंच रहा है। प्रदेश के किसानों को कम दाम मिलने की प्रमुख वजह देश की अन्य बड़ी मंडियों, विशेषकर बंगलुरु और नासिक से टमाटर की भारी आवक है। बाहरी राज्यों से आपूर्ति बढ़ने के कारण हिमाचल के टमाटर की मांग और कीमतों में गिरावट आई है।
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किसान आर्थिक संकट में
सोलन और सिरमौर जिलों को हिमाचल में टमाटर की खेती का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। टमाटर और शिमला मिर्च की फसल यहां के ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। हालांकि, बाजार में आई मंदी से किसानों का पूरा बजट गड़बड़ा गया है। यदि जल्द दाम नहीं सुधरे तो आगामी सीजन में किसान इन नकदी फसलों से दूरी बना सकते हैं। इसका सीधा असर क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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