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Solan News: अर्की के बाड़ीधार में आज होगा पांच पांडवों का मिलन
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बाडीधार मंदिर
मान्यता के अनुसार अज्ञात वास में आखिरी साल पांडवों ने यहीं पर बिताए थे
योगेश शर्मा
अर्की (सोलन)। अर्की के बाड़ीधार में बाड़ेश्वर देव मेले का आयोजन रविवार को किया जाएगा। इस अवसर पर पांच पांडवों का मिलन मुख्य आकर्षण रहेगा। सुबह से ही सारमा मंदिर से युधिष्ठिर, दयोथल से अर्जुन, बुईला से भीम, अंदरोली से नकुल और भैल गांव से सहदेव के निशान बाड़ेश्वर देव बाड़ीधार के प्रांगण में पहुंचेंगे। इनके एक वर्ष बाद मिलन के हजारों श्रद्धालु गवाह बनेंगे। आशाड़ मास की संक्रांति को मनाए जाने वाले इस मेले को लोग उत्सव की तरह मनाते हैं। इस दौरान स्थानीय लोगों के अलावा सोलन, शिमला, बिलासपुर समेत प्रदेश के विभिन्न स्थानों से लोग यहां माथा टेकने पहुंचते हैं। बताया जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के आखिरी साल यहीं पर पहाड़ी और जंगल की गुफाओं में बिताए थे। इस दौरान उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की आराधना की। इसके पश्चात यहां हर वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। अर्की भराड़ीघाट मार्ग पर पिपलूघाट से बाड़ीधार लगभग 10 किलोमीटर दूर हैं और शिमला के प्रसिद्ध रिज मैदान से देखा जा सकता है। बड़ीधार समुद्र तल से 6,781 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान भगवान शिव मंदिर और वार्षिक मेले के लिए प्रसिद्ध है।
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योगेश शर्मा
अर्की (सोलन)। अर्की के बाड़ीधार में बाड़ेश्वर देव मेले का आयोजन रविवार को किया जाएगा। इस अवसर पर पांच पांडवों का मिलन मुख्य आकर्षण रहेगा। सुबह से ही सारमा मंदिर से युधिष्ठिर, दयोथल से अर्जुन, बुईला से भीम, अंदरोली से नकुल और भैल गांव से सहदेव के निशान बाड़ेश्वर देव बाड़ीधार के प्रांगण में पहुंचेंगे। इनके एक वर्ष बाद मिलन के हजारों श्रद्धालु गवाह बनेंगे। आशाड़ मास की संक्रांति को मनाए जाने वाले इस मेले को लोग उत्सव की तरह मनाते हैं। इस दौरान स्थानीय लोगों के अलावा सोलन, शिमला, बिलासपुर समेत प्रदेश के विभिन्न स्थानों से लोग यहां माथा टेकने पहुंचते हैं। बताया जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के आखिरी साल यहीं पर पहाड़ी और जंगल की गुफाओं में बिताए थे। इस दौरान उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की आराधना की। इसके पश्चात यहां हर वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। अर्की भराड़ीघाट मार्ग पर पिपलूघाट से बाड़ीधार लगभग 10 किलोमीटर दूर हैं और शिमला के प्रसिद्ध रिज मैदान से देखा जा सकता है। बड़ीधार समुद्र तल से 6,781 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान भगवान शिव मंदिर और वार्षिक मेले के लिए प्रसिद्ध है।