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हिमाचल के नामकरण का गवाह रहा भवन खस्ताहाल

Tue, 06 Dec 2016 10:05 PM IST
ब्यूरो, सोलन
ब्यूरो, सोलन Updated Tue, 06 Dec 2016 10:05 PM IST
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The oldest Bhavan is uncleaned
हिमाचल के नामकरण का गवाह रहे कचहरी भवन में दरारें गहरी हो गई हैं। - फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल के नामकरण का गवाह रहे कचहरी भवन में दरारें गहरी हो गई हैं। इस एतिहासिक भवन का वजूद खतरे में दिखाई पड़ रहा है। हैरत इस बात की है कि इस भवन में लोनिवि के जिला प्रमुख अधीक्षण अभियंता समेत 45 अधिकारियों और कर्मचारियों का स्टाफ बैठता है। लेकिन भवन के एकदम सामने उभरी दरारें देख ऐसे लगाता है कि मानों कभी कभी भवन ढह जाए।

एसई आफिस होने के चलते यहां सरकारी विकास के कार्याें को लेकर कई लोगों का आना जाना भी रहता है। लेकिन शहर के कोर्ट रोड के बीचोंबीच स्थित यह ऐतिहासिक इमारत अपनी बदहाली पर आंसू बहाने के साथ अनदेखी की कहानी बयां कर रही है। इस भवन को करीब 200 साल पुराना बताया जा रहा है। हालांकि इस भवन को हेरिटेज का दर्जा देने की मांग भी सोलन के लोग उठा चुके हैं। वहीं फिलहाल इस भवन के रखरखाव के जिम्मे को भाषा एवं संस्कृति विभाग को दिए जाने की मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ वहीं ऐतिहासिक भवन का वजूद जरूर खतरे में है।
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इस तरह हिमाचल का हुआ नामकरण
26 जनवरी 1948 को प्रजामंडल के नेताओं की सोलन में एक सभा बुलाई गई। इस सभा में 27 रियासतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बघाट के राजा दुर्गा सिंह को अध्यक्ष चुना गया, भागमल सौहटा को सदन का नेता और महावीर को सचिव। दरबार हाल यानी इसी भवन में तिरंगा लहराने के बाद कार्यवाही आरंभ हुई। सभा में देसी रियासती संघ और प्रजामंडल के हिमालय प्रांत नामों पर विचार विमर्श हुआ। रियासती संघ के नाम पर राजाओं ने समझौते पर प्रस्ताव रखा। अंतत: रियासतों का संघ का नाम हिमाचल प्रदेश रखा गया।  
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समय-समय पर हो रही मुरम्मत
अधीक्षण अभियंता बीके शर्मा ने कहा कि भवन को अंदर से मजबूत किया जा चुका है। समय-समय पर रिपेयर का कार्य चल रहा है। फिल्हाल इस भवन को ही सुधारा जाएगा। लोनिवि कार्यालय को यहां से शिफ्ट करने की कोई योजना नहीं है। इसके अलावा यदि सरकार इस संदर्भ में कोई निर्णय देगी वह स्वीकार्य होगा।

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