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मास्टर जी नहीं मानते आठ किलोमीटर के भीतर रहने के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Sat, 16 Apr 2016 10:28 PM IST
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सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आठ किमी के दायरे में रहने के कायदे कानून सोलन के गुरुजनों पर लागू नहीं होते। विभाग और सरकार की आंखों में धूल झोंककर या किसी न किसी जुगाड़ तंत्र से गुरुजन रोज शाम 30 से 100 किलोमीटर का सफर तय कर शाम को घर वापसी कर लेते हैं।
सोलन समेत बीबीएन के शिक्षण संस्थानों से ऐसे गुरुजनों का काफी बड़ा आंकड़ा है। अकेले बीबीएन में ही एक अनुमान के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक स्टाफ पंचकूला, हरियाणा और कालांअब तक से पहुंचते हैं। सोलन, बीबीएन, नालागढ़, धर्मपुर और कसौली क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इसमें शिमला, पंचकूला, चंडीगढ़ से सरकारी अधिकारी तथा कर्मचारी काफी संख्या में आवाजाही कर रहा है।
शिकायतों पर शिक्षा विभाग कार्रवाई करे भी तो कैसे? अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश ने स्थानीय लोगों की मिलीभगत से लेकर रेजिडेंस प्रूफ सौंप रखे हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने ऐसे गुरुजनों की सूची तलब करने की कवायद शुरू करने जा रहा है।
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ऐसे हो रहा है जुगाड़
सरकार और शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सरकारी स्टाफ को 8 किमी के दायरे में ही रहना सुनिश्चित किया है। इसी आदेश के चलते चंडीगढ़ और पंचकूला में रहने वाले स्टाफ ने स्थानीय लोगों की मदद से यहां के किराएदार होने के शपथपत्र ले रखे हैं। जब भी कार्रवाई की गाज गिरने की होती है तो रेजिडेंस प्रूफ बताकर विभाग की आंखों में धूल झोंक दी जाती है। लेकिन वास्तव में स्थिति इसके ठीक विपरीत है। यह अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी से कुछ समय पहले खिसककर अपने घर निकल जाते हैं।
स्वास्थ्य और अन्य विभाग भी आगे
केवल शिक्षा विभाग ही नहीं स्वास्थ्य और अन्य विभागों के कर्मी भी इसी जुगाड़तंत्र के सहारे रोजाना घर लौट जाते हैं। हालांकि समय-समय पर प्रशासन सर्कुलर जारी करके निर्देश देता रहता है। लेकिन इसके बावजूद सरकारी अफसर हो या कर्मचारी छुट्टी के बाद कई मीलों दूर घर जाने की आदत को नहीं छोड़ते।
मामला प्रूव होने पर कार्रवाई : उपनिदेशक
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक जीवन शर्मा ने बताया कि वे वास्तविक स्थिति से अवगत हैं। सूचनाओं के आधार पर रिपोर्ट तलब की है। अधिकांश अध्यापकों ने अपने रेजीडेंस प्रूफ का स्थानीय मकान मालिकों से शपथपत्र तैयार कर विभाग को सौंपे हैं, जिसे शिक्षा सचिव को भेजा जाता है। ऐसा मामला प्रूव होने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अनुपालना होनी चाहिए : डीसी
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि आठ किमी के दायरे की शर्त कर्मचारियों समेत अफसरों पर लागू होती है। इसकी अनुपालना हो, यह ध्यान रखा जाएगा। अगर ऐसे मामले सामने आते हैं तो विभागाध्यक्षों को कार्रवाई का अधिकार है। यह व्यवस्था सोलन में लागू हो इसका ध्यान रखा जाएगा।
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सोलन समेत बीबीएन के शिक्षण संस्थानों से ऐसे गुरुजनों का काफी बड़ा आंकड़ा है। अकेले बीबीएन में ही एक अनुमान के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक स्टाफ पंचकूला, हरियाणा और कालांअब तक से पहुंचते हैं। सोलन, बीबीएन, नालागढ़, धर्मपुर और कसौली क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इसमें शिमला, पंचकूला, चंडीगढ़ से सरकारी अधिकारी तथा कर्मचारी काफी संख्या में आवाजाही कर रहा है।
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शिकायतों पर शिक्षा विभाग कार्रवाई करे भी तो कैसे? अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश ने स्थानीय लोगों की मिलीभगत से लेकर रेजिडेंस प्रूफ सौंप रखे हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने ऐसे गुरुजनों की सूची तलब करने की कवायद शुरू करने जा रहा है।
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ऐसे हो रहा है जुगाड़
सरकार और शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सरकारी स्टाफ को 8 किमी के दायरे में ही रहना सुनिश्चित किया है। इसी आदेश के चलते चंडीगढ़ और पंचकूला में रहने वाले स्टाफ ने स्थानीय लोगों की मदद से यहां के किराएदार होने के शपथपत्र ले रखे हैं। जब भी कार्रवाई की गाज गिरने की होती है तो रेजिडेंस प्रूफ बताकर विभाग की आंखों में धूल झोंक दी जाती है। लेकिन वास्तव में स्थिति इसके ठीक विपरीत है। यह अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी से कुछ समय पहले खिसककर अपने घर निकल जाते हैं।
स्वास्थ्य और अन्य विभाग भी आगे
केवल शिक्षा विभाग ही नहीं स्वास्थ्य और अन्य विभागों के कर्मी भी इसी जुगाड़तंत्र के सहारे रोजाना घर लौट जाते हैं। हालांकि समय-समय पर प्रशासन सर्कुलर जारी करके निर्देश देता रहता है। लेकिन इसके बावजूद सरकारी अफसर हो या कर्मचारी छुट्टी के बाद कई मीलों दूर घर जाने की आदत को नहीं छोड़ते।
मामला प्रूव होने पर कार्रवाई : उपनिदेशक
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक जीवन शर्मा ने बताया कि वे वास्तविक स्थिति से अवगत हैं। सूचनाओं के आधार पर रिपोर्ट तलब की है। अधिकांश अध्यापकों ने अपने रेजीडेंस प्रूफ का स्थानीय मकान मालिकों से शपथपत्र तैयार कर विभाग को सौंपे हैं, जिसे शिक्षा सचिव को भेजा जाता है। ऐसा मामला प्रूव होने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अनुपालना होनी चाहिए : डीसी
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि आठ किमी के दायरे की शर्त कर्मचारियों समेत अफसरों पर लागू होती है। इसकी अनुपालना हो, यह ध्यान रखा जाएगा। अगर ऐसे मामले सामने आते हैं तो विभागाध्यक्षों को कार्रवाई का अधिकार है। यह व्यवस्था सोलन में लागू हो इसका ध्यान रखा जाएगा।