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Solan News: नौणी विवि में खुलेगा प्रदेश का पहला मधु विज्ञान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
Sat, 10 Oct 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:39 AM IST
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मधुपालन की गतिविधियों, बी-फ्लॉरा और एपी थेरेपी पर होगा गहन शोध
शहद की शुद्धता और गुणवत्ता परखने के लिए की जाएगी विशेष टेस्टिंग
एपी थेरेपी के लिए स्थापित होगा विशेष केंद्र, विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
ललित कश्यप
सोलन। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में हिमाचल प्रदेश का पहला मधु विज्ञान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेश में मधुमक्खी पालन और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
विश्वविद्यालय परिसर में बनने वाले इस केंद्र में मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, मधुमक्खियों के लिए उपयोगी पुष्पों (बी-फ्लोरा) और एपीथेरेपी (मधुमक्खी उत्पादों के चिकित्सकीय उपयोग) पर शोध किया जाएगा। यहां शहद की शुद्धता और गुणवत्ता जांचने के लिए आधुनिक प्रयोगशाला भी स्थापित होगी। इससे किसान और शहद उत्पादक अपने उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित करवा सकेंगे और बेहतर बाजार मूल्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
इनसेट: मधुमक्खी के विष और पोषण मूल्य पर होगा शोध
केंद्र में मधुमक्खी के विष (बी-वेनम), रॉयल जेली, प्रोपोलिस और बी-पोलन के पोषण एवं औषधीय गुणों पर शोध किया जाएगा। साथ ही, एपीथेरेपी से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विशेष केंद्र विकसित करने की योजना है। इन उत्पादों के संभावित चिकित्सकीय उपयोगों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
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इनसेट: विद्यार्थियों और बागवानों को मिलेगा लाभ
केंद्र स्थापित होने से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं मिलेंगी। वहीं, किसानों और बागवानों को मधुमक्खी पालन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मधुमक्खियों से फसलों में परागण बेहतर होने से सेब सहित अन्य फल और सब्जियों के उत्पादन में भी वृद्धि हो सकती है।
कोट
नौणी विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाला मधु विज्ञान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश के किसानों और शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे शहद और मधुमक्खी के विष जैसे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के साथ एपीथेरेपी के क्षेत्र में नए शोध के अवसर भी मिलेंगे। - प्रो. एचएस बवेजा, कुलपति, नौणी विश्वविद्यालय
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शहद की शुद्धता और गुणवत्ता परखने के लिए की जाएगी विशेष टेस्टिंग
एपी थेरेपी के लिए स्थापित होगा विशेष केंद्र, विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
ललित कश्यप
सोलन। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में हिमाचल प्रदेश का पहला मधु विज्ञान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेश में मधुमक्खी पालन और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
विश्वविद्यालय परिसर में बनने वाले इस केंद्र में मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, मधुमक्खियों के लिए उपयोगी पुष्पों (बी-फ्लोरा) और एपीथेरेपी (मधुमक्खी उत्पादों के चिकित्सकीय उपयोग) पर शोध किया जाएगा। यहां शहद की शुद्धता और गुणवत्ता जांचने के लिए आधुनिक प्रयोगशाला भी स्थापित होगी। इससे किसान और शहद उत्पादक अपने उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित करवा सकेंगे और बेहतर बाजार मूल्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
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इनसेट: मधुमक्खी के विष और पोषण मूल्य पर होगा शोध
केंद्र में मधुमक्खी के विष (बी-वेनम), रॉयल जेली, प्रोपोलिस और बी-पोलन के पोषण एवं औषधीय गुणों पर शोध किया जाएगा। साथ ही, एपीथेरेपी से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विशेष केंद्र विकसित करने की योजना है। इन उत्पादों के संभावित चिकित्सकीय उपयोगों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
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इनसेट: विद्यार्थियों और बागवानों को मिलेगा लाभ
केंद्र स्थापित होने से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं मिलेंगी। वहीं, किसानों और बागवानों को मधुमक्खी पालन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मधुमक्खियों से फसलों में परागण बेहतर होने से सेब सहित अन्य फल और सब्जियों के उत्पादन में भी वृद्धि हो सकती है।
कोट
नौणी विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाला मधु विज्ञान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश के किसानों और शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे शहद और मधुमक्खी के विष जैसे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के साथ एपीथेरेपी के क्षेत्र में नए शोध के अवसर भी मिलेंगे। - प्रो. एचएस बवेजा, कुलपति, नौणी विश्वविद्यालय