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Solan News: किन्नौर में खेत बचाओ अभियान शुरू
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जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए नौणी विवि की पहल
पूह विकास खंड के नाको और स्पीलो गांवों से किया शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि के कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर ने एक माह के विशेष अभियान का शुभारंभ किया। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलने वाले खेत बचाओ अभियान से विशेषज्ञ किसान और बागवानों को जागरूक किया जाएगा।
इस अभियान का पूह विकास खंड के उच्च हिमालयी गांवों नाको और स्पीलो से शुभारंभ किया गया। केवीके किन्नौर के प्रभारी एवं सह-निदेशक डॉ. प्रमोद शर्मा ने उपनिदेशक उद्यान डॉ. शमशेर सिंह तथा आत्मा परियोजना निदेशक डॉ. रमेश लाल के साथ मिलकर दो विशेष बहु-विषयक टीमों का गठन किया है। इन वैज्ञानिकों के साथ उद्यान एवं कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अधिकारी भी मुस्तैदी से फील्ड में उतर चुके हैं। अभियान किन्नौर जिले के तीनों विकास खंडों के 42 अलग-अलग स्थानों को कवर करेगा। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों, किसान-वैज्ञानिक संवाद, क्षेत्रीय प्रदर्शनों और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से किसानों तक सीधी वैज्ञानिक सिफारिशें पहुंचाई जाएंगी। इसमें रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक और प्राकृतिक खेती, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों के लाभों की जानकारी दी जाएगी।
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पूह विकास खंड के नाको और स्पीलो गांवों से किया शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि के कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर ने एक माह के विशेष अभियान का शुभारंभ किया। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलने वाले खेत बचाओ अभियान से विशेषज्ञ किसान और बागवानों को जागरूक किया जाएगा।
इस अभियान का पूह विकास खंड के उच्च हिमालयी गांवों नाको और स्पीलो से शुभारंभ किया गया। केवीके किन्नौर के प्रभारी एवं सह-निदेशक डॉ. प्रमोद शर्मा ने उपनिदेशक उद्यान डॉ. शमशेर सिंह तथा आत्मा परियोजना निदेशक डॉ. रमेश लाल के साथ मिलकर दो विशेष बहु-विषयक टीमों का गठन किया है। इन वैज्ञानिकों के साथ उद्यान एवं कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अधिकारी भी मुस्तैदी से फील्ड में उतर चुके हैं। अभियान किन्नौर जिले के तीनों विकास खंडों के 42 अलग-अलग स्थानों को कवर करेगा। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों, किसान-वैज्ञानिक संवाद, क्षेत्रीय प्रदर्शनों और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से किसानों तक सीधी वैज्ञानिक सिफारिशें पहुंचाई जाएंगी। इसमें रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक और प्राकृतिक खेती, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों के लाभों की जानकारी दी जाएगी।
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