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जनता के रखवालों, के सिर पर छत तक नहीं
ब्यूरो, अरकी सोलन
Updated Tue, 12 Jul 2016 10:08 PM IST
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क्षेत्र की जनता और उनकी संपत्ति की सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने को तैनात खाकी के सरकारी आशियाने असुरक्षित हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र की जनता और उनकी संपत्ति की सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने को तैनात खाकी के सरकारी आशियाने असुरक्षित हैं। पुलिस स्टेशन के रिहायशी कमरों के हालात इतने बदतर हैं कि कभी भी छत गिर सकती है। दिन रात बिना टाइमिंग के ड्यूटी बजाने के दौरान आराम करने के लिए दिए कमरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
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छतें टूटी पड़ी हैं। यही नहीं सीमेंट की टूटी हुई चादरों पर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के प्लास्टिक के टुकड़ों, गली हुई लोहे की चद्दरों और तिरपाल को प्लास्टिक की रस्सियों से बांधकर काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में इन कमरों में रहना खतरे से खाली नहीं। उधर डीएसपी नरवीर राठौर का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में है। विभाग को इन भवनों की मरम्मत के बारे में लिखित रूप से प्रस्ताव भेजा है। जैसे ही पैसा आएगा इनकी मरम्मत करवा दी जाएगी।
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कोई तो ले इनकी सुध
स्थानीय लोगों में योगेश शर्मा, अजय, ईशान, जीतराम, अनीश भाटिया, दीपक शर्मा, गंगा राम और रोहित ने कहा कि अर्की पुलिस थाने में रिहायाशी कमरों की हालत चिंताजनक है। उपमंडल मुख्यालय में इस तरह के हालात चिंताजनक हैं। बारिश और बरसात में सीलन और पानी रिसने से यहां रुकने वाले पुलिस के जवान बीमार तक पड़ सकते हैं। लिहाजा नए भवनों का निर्माण करवाया जाना चाहिए। अथवा पुराने भवनों पर ही लेंटर डाला जाना चाहिए।
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राजाओं के समय के बने हैं भवन
यह भवन राजाओं के समय के बने हैं। हालात यह है कि किसी के शीशे टूटे हुए हैं तथा कहीं खिड़कियों और दरवाजों में दीमक लगी है। कुछ कमरों की छतों की चादरें तक टूटी हुई हैं। कुछ कमरों की चादरें बंदरों द्वारा उछल कूद के कारण उखड़ गई हैं तथा हवा चलने से उड़ती रहती हैं। इसके चलते 24 में से 18 घंटे रात दिन वर्षा धूप तूफान आदि भी न देख ड्यूटी देने वाले पुलिस कर्मियों को आराम तथा चैन की नींद भी नसीब नहीं होती।