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बीबीएन में 12 उद्योगों के ट्रीटेड पानी के सैंपल फेल
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Fri, 19 Feb 2016 06:24 PM IST
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बद्दी (सोलन)। बीबीएन के 12 उद्योगों से निकलने वाला ट्रीट पानी पर्यावरण में जहर घोल रहा है। इन उद्योगों में जल शोधक संयंत्रों से निकलने वाला पानी मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
इस पर प्रदूषण नियंत्र बोर्ड ने इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। उद्योग संचालकों को ईटीपी प्लांट से निकलने वाले पानी को और साफ करने के निर्देश दिए हैं।
बद्दी में प्राकृतिक पेयजल स्रोत नहीं है। यहां ट्यूबवेल से ही पानी निकाला जाता है। लिहाजा गंदा पानी जमीन में रिसकर अंडरग्राउंड पानी को भी दूषित कर रहा है।
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बोर्ड ने चेतावनी दी है कि अगर इसमें जल्द सुधार नहीं किया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बीबीएन में करीब तीन हजार छोटे बड़े उद्योग हैं।
इन उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी को ट्रीट करने लिए प्रदूषण बोर्ड की ओर से हर उद्योग में ईटीपी लगाना अनिवार्य किया है। बोर्ड की ओर से उद्योग के संचालकों को हिदायत दी है, वह पानी को ट्रीट करने के बाद ही खुले में छोड़े। इसकी बोर्ड की ओर से समय-समय पर जांच भी की जाती है।
परवाणू लैब में अधोमानक निकले सैंपल
प्रदूषण बोर्ड ने हाल ही में लिए उद्योगों के ईटीपी प्लांट से पानी के सैंपल जांच के लिए बोर्ड की केंद्रीय लैब परवाणू में भेजे थे। इसमें एक दर्जन उद्योगों के सैंपल फेल हो गए हैं। प्रदूषण बोर्ड ने इन उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। प्रदूषण बोर्ड के मानकों के तहत पानी में बीओडी की मात्रा 30 से कम होनी चाहिए लेकिन इन उद्योगों के पानी में बीओडी की मात्रा तीस से अधिक पाई गई। इस पर विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।
12 उद्योगों के सैंपल फेल : गुप्ता
प्रदूषण बोर्ड के वरिष्ठ अभियंता प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बोर्ड की ओर से हर फैक्टरी के ईटीपी प्लांट से पानी के सैंपल लिए जाते हैं। एक दर्जन उद्योगों के सैंपल इसमें फेल पाए गए हैं। उन्होंने संबंधित उद्योगों को सूचित किया है कि वह बीओडी की मात्रा को कम करें। अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड की ओर से पानी और बिजली के कनेक्शन भी काटे जा सकते हैं। उन्होंने कंपनी संचालकों से कहा कि बद्दी के केंदूवाल में संयुक्त जल शोधक संयंत्र स्थापित है। कहा कि जिन उद्योगों के सैंपल पास नहीं हैं वह संयंत्र का कनेक्शन लेकर पानी पाइप लाइन में छोड़े।
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इस पर प्रदूषण नियंत्र बोर्ड ने इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। उद्योग संचालकों को ईटीपी प्लांट से निकलने वाले पानी को और साफ करने के निर्देश दिए हैं।
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बद्दी में प्राकृतिक पेयजल स्रोत नहीं है। यहां ट्यूबवेल से ही पानी निकाला जाता है। लिहाजा गंदा पानी जमीन में रिसकर अंडरग्राउंड पानी को भी दूषित कर रहा है।
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बोर्ड ने चेतावनी दी है कि अगर इसमें जल्द सुधार नहीं किया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बीबीएन में करीब तीन हजार छोटे बड़े उद्योग हैं।
इन उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी को ट्रीट करने लिए प्रदूषण बोर्ड की ओर से हर उद्योग में ईटीपी लगाना अनिवार्य किया है। बोर्ड की ओर से उद्योग के संचालकों को हिदायत दी है, वह पानी को ट्रीट करने के बाद ही खुले में छोड़े। इसकी बोर्ड की ओर से समय-समय पर जांच भी की जाती है।
परवाणू लैब में अधोमानक निकले सैंपल
प्रदूषण बोर्ड ने हाल ही में लिए उद्योगों के ईटीपी प्लांट से पानी के सैंपल जांच के लिए बोर्ड की केंद्रीय लैब परवाणू में भेजे थे। इसमें एक दर्जन उद्योगों के सैंपल फेल हो गए हैं। प्रदूषण बोर्ड ने इन उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। प्रदूषण बोर्ड के मानकों के तहत पानी में बीओडी की मात्रा 30 से कम होनी चाहिए लेकिन इन उद्योगों के पानी में बीओडी की मात्रा तीस से अधिक पाई गई। इस पर विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।
12 उद्योगों के सैंपल फेल : गुप्ता
प्रदूषण बोर्ड के वरिष्ठ अभियंता प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बोर्ड की ओर से हर फैक्टरी के ईटीपी प्लांट से पानी के सैंपल लिए जाते हैं। एक दर्जन उद्योगों के सैंपल इसमें फेल पाए गए हैं। उन्होंने संबंधित उद्योगों को सूचित किया है कि वह बीओडी की मात्रा को कम करें। अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड की ओर से पानी और बिजली के कनेक्शन भी काटे जा सकते हैं। उन्होंने कंपनी संचालकों से कहा कि बद्दी के केंदूवाल में संयुक्त जल शोधक संयंत्र स्थापित है। कहा कि जिन उद्योगों के सैंपल पास नहीं हैं वह संयंत्र का कनेक्शन लेकर पानी पाइप लाइन में छोड़े।