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Solan News: निफ्टेम के छात्रों ने 40 महिलाओं को सिखाया अचार बनाना
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साधुपुल में ग्रामीण महिलाओं को गुणवत्ता सुधारने और आय बढ़ाने के लिए दिया गया तकनीकी ज्ञान
संवाद न्यूज एजेंसी
कंडाघाट (सोलन)। ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत निफ्टेम कुंडली के विद्यार्थियों ने साधुपुल क्षेत्र की महिलाओं को अचार बनाने की तकनीक, लेबलिंग, और स्वच्छ उत्पादन तैयार करने का प्रशिक्षण प्रदान किया। पांच दिन तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र की लगभग 40 महिलाओं ने भाग लिया। वीरवार को शिविर का सफल समापन किया गया इस अवसर पर सभी प्रशिक्षित महिलाओं को प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। शिविर के दौरान प्रो. सपना अरोड़ा, डॉ. अंशुल धवन, डॉ. दिशा गुलिया और पीएचडी शोधार्थी कपिल ने राओली गांव में अमृतरस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को विशेष रूप से अचार बनाना, सुरक्षित पैकिंग, स्वच्छता आधारित उत्तम उत्पादन प्रक्रियाएं और सुरक्षित निर्माण पद्धतियों पर प्रशिक्षित किया। इस पहल में नॉन फार्म सीआरपी मीना ठाकुर ने भी विद्यार्थियों को सहयोग दिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को स्वच्छ कार्यप्रणाली, सामग्री का उचित चयन, उपकरणों की सफाई, सुरक्षित पैकिंग, और उत्पाद की विस्तृत जानकारी दर्शाने वाले लेबल की अनिवार्यताओं के बारे में विस्तार से बताया गया। टीम ने समूह के लिए एक पहचान चिंह्न (लोगो) और एक मानक कार्यप्रणाली भी तैयार कर समूह को सौंपी। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी ज्ञान प्रदान कर उनके उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाना और उन्हें स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कंडाघाट (सोलन)। ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत निफ्टेम कुंडली के विद्यार्थियों ने साधुपुल क्षेत्र की महिलाओं को अचार बनाने की तकनीक, लेबलिंग, और स्वच्छ उत्पादन तैयार करने का प्रशिक्षण प्रदान किया। पांच दिन तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र की लगभग 40 महिलाओं ने भाग लिया। वीरवार को शिविर का सफल समापन किया गया इस अवसर पर सभी प्रशिक्षित महिलाओं को प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। शिविर के दौरान प्रो. सपना अरोड़ा, डॉ. अंशुल धवन, डॉ. दिशा गुलिया और पीएचडी शोधार्थी कपिल ने राओली गांव में अमृतरस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को विशेष रूप से अचार बनाना, सुरक्षित पैकिंग, स्वच्छता आधारित उत्तम उत्पादन प्रक्रियाएं और सुरक्षित निर्माण पद्धतियों पर प्रशिक्षित किया। इस पहल में नॉन फार्म सीआरपी मीना ठाकुर ने भी विद्यार्थियों को सहयोग दिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को स्वच्छ कार्यप्रणाली, सामग्री का उचित चयन, उपकरणों की सफाई, सुरक्षित पैकिंग, और उत्पाद की विस्तृत जानकारी दर्शाने वाले लेबल की अनिवार्यताओं के बारे में विस्तार से बताया गया। टीम ने समूह के लिए एक पहचान चिंह्न (लोगो) और एक मानक कार्यप्रणाली भी तैयार कर समूह को सौंपी। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी ज्ञान प्रदान कर उनके उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाना और उन्हें स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।