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Solan News: कोहरे वाले क्षेत्रों में गहरा रंग देगी सेब की नई किस्म

Wed, 22 Apr 2026 11:47 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 11:47 PM IST
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नौणी विवि की बड़ी उपलब्धि, सेब की नई किस्म कंवर मझोली सिलेक्शन-1 पंजीकृत
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मझोली गांव के जोगिंदर सिंह कंवर और नौणी विवि के वैज्ञानिकों की मेहनत लाई रंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश के बागवानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और शिमला के एक प्रगतिशील बागवान के संयुक्त प्रयासों से सेब की एक नई किस्म विकसित की गई है। इस किस्म को पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण ने आधिकारिक तौर पर कंवर मझोली सिलेक्शन-1 के नाम से पंजीकृत किया है। यह सफलता शिमला जिले के कथोग क्षेत्र के मझोली गांव के स्वर्गीय जोगिंदर सिंह कंवर के तीक्ष्ण अवलोकन और नौणी विवि के मशोबरा केंद्र के वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम है। वर्ष 2016 में जोगिंदर सिंह कंवर ने अपने 47 साल पुराने रेड डिलीशियस के पेड़ की सबसे निचली शाखा पर कुछ अलग और गहरे रंग के फल देखे। विवि के वैज्ञानिकों डॉ. दिनेश सिंह ठाकुर और डॉ. नीना चौहान ने वर्ष 2017 में इसे शाखा उत्परिवर्तन के रूप में पहचाना। वैज्ञानिकों ने उस शाखा से बडवुड लेकर उसे ड्वॉर्फ एम9 रूट स्टॉक पर ग्राफ्ट किया और 4-5 वर्षों तक समुद्र तल से 2,286 मीटर की ऊंचाई पर इसका गहन विश्लेषण किया। अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने बताया कि विवि ने इस किस्म को नई किसान किस्म के रूप में संरक्षित करने के लिए कंवर मझोली सिलेक्शन-1 नाम से पंजीकरण के लिए पीपीवी एंड एफआरए आवेदन भेजा। मशोबरा केंद्र के वैज्ञानिकों ने आवश्यक पासपोर्ट डाटा एकत्र किया और वर्ष 2016 से इस किस्म के विकास और दस्तावेजीकरण में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उनके प्रयासों को अंततः इस किस्म के आधिकारिक पंजीकरण के रूप में सफलता मिली।

क्यों खास है कंवर मझोली सिलेक्शन-1
कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बताया कि इस नई किस्म में रेड डिलीशियस के सभी बेहतरीन गुणों के साथ-साथ दो बड़ी विशेषताएं हैं। इस किस्म के फलों में रंग जल्दी और गहरा आता है। यह उन क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है जहां कोहरे के कारण सेब में अच्छा रंग लाना बागवानों के लिए चुनौती बना रहता है। डॉ. चंदेल ने बताया कि किसान परिवार की पूर्व अनुमति से इस किस्म का वर्तमान में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर कंवर रेड नाम से बहु-स्थान प्रदर्शन परीक्षण के लिए मूल्यांकन किया जा रहा है।
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