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Solan News: जिले में अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी फॉल आर्मीवर्म से मक्की की फसल तबाह

Mon, 27 Jul 2026 12:19 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 12:19 AM IST
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Maize crops in the district's hilly areas have now also been devastated by the Fall Armyworm.
मक्की के पौधों में लगी फॉल आर्मीवर्म बीमारी के कारण खराब हुई फसल। संवाद
सोलन, कुनिहार, बीबीएन में मक्की में लगी सुंडी रुकने का नहीं ले रही नाम
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कृषि विभाग और केवीके सोलन ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवर्म (सुंडी) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अब मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी यह कीड़ा मक्की की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। सोलन, कुनिहार और बीबीएन क्षेत्र में फसल को लग रही यह सुंडी थमने का नाम नहीं ले रही है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं। किसानों की इस समस्या को देखते हुए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र सोलन ने किसानों की मदद के लिए एक खास एडवाइजरी जारी की है। केंद्र प्रभारी डॉ. सीमा ठाकुर ने बताया कि किसानों को फसल के अंकुरण के सात से दस दिन बाद से हर हफ्ते अपने खेतों का निरीक्षण करना चाहिए। खेत में जाकर कम से कम 20 से 25 पौधों की जांच करें। अगर पत्तियों में खिड़की की तरह पतले निशान, नई पत्तियों में छेद, पौधे के बीच वाले भाग में भूरे रंग का मल या छिपी हुई सुंडी दिखे, तो तुरंत सावधान हो जाएं। रोकथाम के लिए विशेषज्ञों ने कई आसान उपाय बताए हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे नाइट्रोजन खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें और खेत को खरपतवार से बिल्कुल साफ रखें। अगर किसी पौधे में कीड़ा बहुत ज्यादा लग गया है, तो उसे शुरुआत में ही उखाड़कर नष्ट कर दें। फसल कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई जरूर करें ताकि मिट्टी में छिपे कीड़े नष्ट हो जाएं। इसके अलावा, हाथ से सुंडियों को बीनकर खत्म किया जा सकता है या शुरुआती दौर में पौधे के बीच वाले भाग में सूखी रेत या राख डालकर भी कीट पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

ऐसे करें समाधान
जैविक नियंत्रण के लिए खेत में मित्र कीड़ों जैसे लेडीबर्ड बीटल का संरक्षण करें और बैसिलस थुरिंजिएन्सिस या ब्यूवेरिया बेसियाना जैसे जैव-कीटनाशकों का प्रयोग करें। कीट की निगरानी के लिए प्रति हेक्टेयर 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। यदि खेत में 5 से 10 प्रतिशत पौधों पर कीड़े का असर दिखने लगे, तभी रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करें। ध्यान रखें कि दवा का घोल पौधे के बीच वाले भाग यानी पर्णगुच्छ के अंदर तक पहुंचना जरूरी है। सीआईबीआरसी द्वारा मंजूर की गई मुख्य दवाओं में क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत 0.4 मिली प्रति लीटर पानी, फ्लूबेंडियामाइड 20 प्रतिशत 0.25 ग्राम प्रति लीटर, स्पिनेटोरम 11.7 एससी 0.5 मिली प्रति लीटर शामिल हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर सही कदम उठाकर अपनी फसल की सुरक्षा करें।

मक्की के पौधों में लगी फॉल आर्मीवर्म बीमारी के कारण खराब हुई फसल। संवाद

मक्की के पौधों में लगी फॉल आर्मीवर्म बीमारी के कारण खराब हुई फसल। संवाद

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