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आधुनिकता के दौर में गायब हो गए लोहड़ी गीत

Wed, 11 Jan 2017 10:08 PM IST
ब्यूरो, सोलन
ब्यूरो, सोलन Updated Wed, 11 Jan 2017 10:08 PM IST
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Lohri song missing in tradition in solan
आधुनिकता की दौड़ में भी लोग अपनी प्राचीन परंपराओं और तीज त्योहारों को भूलते जा रहे हैं। - फोटो : demo pic

आधुनिकता की दौड़ में भी लोग अपनी प्राचीन परंपराओं और तीज त्योहारों को भूलते जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है लोहड़ी पर्व। करीब 10 वर्ष पूर्व गली मोहल्लों में शाम के समय नवयुवकों की टोलियों द्वारा घर-घर जाकर लोहड़ी मांगे लकड़ी, बसंत मांगे चूर और सुंदरिए नी मुंदरिए तेरा कौन बेचारा हो से पारंपरिक लोहड़ी के गीत गाए जाते थे। लोग एक सप्ताह पहले ही लोहड़ी जलाने के लिए लकड़ियां इकट्ठा करना आरंभ कर देते थे। लेकिन अब यह सब परंपराएं गायब होती जा रही हैं। इस बार लोहड़ी वाले दिन के त्योहार को लेकर इलाके में कोई विशेष रौनक देखने को नहीं मिल रही। न तो नवयुवकों और बच्चों की टोलियां लोहड़ी के गीत गाती दिखाई दे रही हैं।

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अब तो एक आध मोहल्लों में लोहड़ी दहन के लिए लकड़ी का इंतजाम होता है। कुछ वर्ष पहले तक लोहड़ी के मौके पर एक सप्ताह पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती थीं लेकिन अब त्यौहार को केवल दो-तीन दिन शेष रहने के बावजूद शहर में कोई खास रौनक नजर नहीं आ रही। लोहड़ी का त्योहार आपसी भाईचारे का प्रतीक माना है, लेकिन धीरे-धीरे इस पर्व की चमक फीकी पड़ती जा रही है। जिले के विभिन्न हिस्सों में दुकानों पर मूंगफली और रेवड़ियां तो बिक रही हैं लेकिन लोगों में पुराना उत्साह दिखाई नहीं दे रहा। लोगों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और तीज त्योहारों में रुचि कम होती जा रही है।
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बच्चों को तो लोहड़ी के गीत भी याद नहीं
क्षेत्र के युवा अरुण, सन्नी, योगेश, विजय, आदित्य, रमेश, सुरेश, दीपक, गणेश और अन्य ने बताया कि वे भी घर-घर जाकर लोहड़ी के गीत गाकर पैसे इकट्ठे किया करते थे लेकिन अब इस पीढ़ी के बच्चे त्योहारों से दूर होते जा रहे हैं। इनका कहना है कि बच्चों को तो शायद अब लोहड़ी के पूरे गीत भी याद नहीं होंगे। आने वाले वर्षों में तो लोहड़ी का त्योहार मात्र औपचारिकता बनकर ही न रह जाए।
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बाजार में लोहड़ी की रौनक फिकी
लोहड़ी के मौके पर बाजार में हालांकि खासी रौनक नहीं है लेकिन फिर भी लोग शगुन मात्र के लिए खरीददारी कर रहे हैं। लोहड़ी के दिन शाम को सबसे पहले लोग एकत्रित होकर पूजन करते हैं। इसके बाद लोहड़ी का दहन होता है। बाजार में मूंगफली 80 से 100 रुपये प्रतिकिलो बिक रही है। रेवड़ी 100 से 150 रुपये प्रतिकिलो, गचक 100 से 150 रुपये प्रतिकिलो और तिल खोया 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं।

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