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आग से सुरक्षित नहीं जिला में 60 फीसदी उद्योग

Sun, 17 Apr 2016 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन Updated Sun, 17 Apr 2016 10:35 PM IST
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औद्योगिक जिला सोलन में सैकड़ों उद्योग आग से खेल रहे हैं। सरकार की नाक तले नियमों को ताक पर रखकर बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी के ही 60 फीसदी इकाइयां संचालित हो रही हैं। यही नहीं सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में भी नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।

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अग्निशमन विभाग औपचारिकता मात्र रिपोर्ट तैयार कर आला अधिकारियों को सूचना का काम कर रहा है। इस लापरवाही को देखने वाला कोई नहीं। ऐसे में यदि भयंकर आगजनी होती है तो जानमाल के नुकसान का जिम्मेवार कौन होगा? अग्निशमन विभाग के अधिकारी जुर्माने की शक्तियां न होने का हवाला देकर पल्लू झाड़ रही हैं। जिला प्रशासन कार्रवाई का आश्वासन दे रहा है। हर रोज बारूद के ढेर पर उत्पादन हो रहा है।
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बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़
बीबीएन सोलन बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ में सबसे अधिक नियम तोड़े जा रहे हैं। अग्निशमन विभाग के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक महज 30 से 40 फीसदी उद्योगों ने ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है। शेष उद्योग बिना एनओसी के चल रहे हैं। सरकारी संस्थाओं के आंकड़े सर्वाधिक हैरान करने वाले हैं। यहां आंकड़ा 15 से 25 फीसदी का है।  यहां पर अगर आगजनी की घटना हो जाती है तो सुरक्षा राम भरोसे है।
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चौंकिये मत यह हकीकत है
बीबीएन में 28 सौ के आसपास बड़े और छोटे उद्योग हैं। 10 फीसदी बड़े उद्योग हैं, जिनमें सभी उद्योगों ने एनओसी ली है। चालिस फीसदी मध्यम वर्ग के उद्योग हैं। इन में से 20 फीसदी उद्योगों ने फायर ब्रिगेड से एनओसी ली है। इसके अलावा 50 फीसदी लघु उद्योग हैं जिसमें मात्र 10 फीसदी ही उद्योगों ने एनओसी ले रखी हैं।

सोलन और परवाणू की रिपोर्ट
औद्योगिक नगर सोलन और परवाणू में करीब तीन सौ उद्योग अग्निशमन विभाग की एनओसी के बगैर चल रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इस औद्योगिक नगर में कई बहुनामी कंपनियां भी हैं। अग्निशमन विभाग की बार-बार जारी हिदायतों के बावजूद एनओसी लेने की कवायद पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हो रही है।

फायर अधिकारियों के हाथ खड़े
अग्निशमन विभाग बद्दी के अधिकारियों के मुताबिक जिन निजी उद्योगों के पास एनओसी नहीं है उन्हें लिखित रूप से अवगत करवा दिया है। दूसरी ओर से सरकारी स्कूलों, विभागों में भी औचक निरीक्षण कर यहां की रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों को भेजा है। परवाणू में करीब पांच सौ उद्योग हैं। इनमें से तीन सौ के पास एनओसी नहीं है। फायर हाइड्रेंट के विस्तार के लिए भी प्रस्ताव भेजा है। फायर आफिसर को किसी संस्थान को जुर्माना करने का अधिकार नहीं है। इसके चलते उन्होंने आगामी कार्रवाई के लिए विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया है।

उठाए जाएंगे कदम : उपायुक्त
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि यह दमकल विभाग के अधिकारियों का कर्तव्य है कि उद्योगों में फायर एनओसी न होने पर लिखित में प्रशासन को सूचना दें। कहा कि यदि दमकल विभाग उन्हें सूचना देते हैं तो इस पर नियमानुसार कार्रवाई के प्रयास होंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं से निजी और सरकार संपत्ति का नुकसान होता है, जिसके बचाव के लिए उपाय करना उद्यमियों का कर्तव्य है।

जिला सोलन के उद्योगों में बड़े हादसे
केस 1 : 2 जून 2009 को नालागढ़-बद्दी हाईवे मार्ग पर डाडीकानियां में हुए भीषण अग्निकांड में भारी संपत्ति जलकर राख हो गई थी। 9 कामगारों और कर्मचारियों को जान से हाथ धोना पड़ा था।

केस 2 : 2 जून 1996 को साई रोड बद्दी में गोविंद फार्मा उद्योग में हुए भीषण अग्निकांड में 8 इंजीनियर जिंदा जल गए थे। उद्योग की संपत्ति को भी भारी नुकसान हुआ था।

केस 3 : 17 मई, 2012 को झाड़माजरी के हिलटाप में स्थित लाइफ साइंस उद्योग में लगी भीषण आग से करीब एक करोड़ रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई थी। इस उद्योग की एनओसी समाप्त थी, वहीं फायर हाइड्रेंट भी नहीं थे।


मामला 4 : 8 अप्रैल 2013 को नालागढ़-बददी हाईवे मार्ग पर भुड्ड स्थित कैचड फार्मा उद्योग में भीषण आगजनी में उद्योग को करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।

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