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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Helplessness: Doctors at Solan hospital buy stethoscopes from their own pockets to measure patients' heartbeats.

लाचारी : अपनी जेब से स्टेथोस्कोप खरीद मरीजों की धड़कनें नाप रहे सोलन अस्पताल के डॉक्टर

Tue, 02 Jun 2026 01:18 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:18 AM IST
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अस्पताल में रोज आ रहे 1500 मरीज, छोटे-मोटे उपकरणों की भारी कमी से जूझ रहा स्टाफ
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दूसरी तरफ स्टोर रूम के डिब्बों में धूल फांक रहे आईसीयू के उपकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में स्वास्थ्य सुविधाओं की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में डॉक्टरों के पास मरीजों की जांच करने के लिए बुनियादी उपकरणों तक का टोटा है। आलम यह है कि डॉक्टरों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर स्टेथोस्कोप जैसे जरूरी उपकरण खरीदने पड़ रहे हैं। इस बेबसी के बावजूद डॉक्टर रोजाना अस्पताल पहुंचने वाले 1000 से 1500 मरीजों की जांच कर अपना फर्ज निभा रहे हैं। अस्पताल में सिर्फ छोटे ही नहीं, बल्कि बड़े टेस्ट के उपकरणों की भी भारी किल्लत है। उदाहरण के तौर पर, नेफ्रोस्कोपी टेस्ट के लिए पूरे अस्पताल में महज एक ही मशीन उपलब्ध है। इसके चलते डॉक्टरों को बारी-बारी से मरीजों की जांच करनी पड़ती है, जिससे समय की बर्बादी होती है और गंभीर मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
डिब्बों में बंद पड़े हैं आईसीयू के उपकरण
एक तरफ जहां डॉक्टर और मरीज सामान की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी लापरवाही का बड़ा नमूना भी देखने को मिला है। सरकार की ओर से अस्पताल को इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) के आधुनिक उपकरण भेजे गए हैं, लेकिन ये इंस्टॉल होने के बजाय महीनों से स्टोर रूम के डिब्बों में बंद पड़े धूल फांक रहे हैं। अब अस्पताल प्रशासन इन्हें सीधे कथेड़ में बन रहे नए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे वर्तमान में मरीजों को इनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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कोट
अस्पताल में छोटे-बड़े कई उपकरणों की कमी है। डॉक्टर अपनी जेब से छोटे उपकरण खरीदकर काम चला रहे हैं, लेकिन बड़ी मशीनों की खरीद डॉक्टरों के बस में नहीं है। हमने स्टेथोस्कोप से लेकर बड़ी मशीनों तक की पूरी लिस्ट सरकार को भेज दी है। नए डॉक्टरों की डिमांड भी भेजी जा रही है। कम उपकरणों के बाद भी मरीजों को कोई असुविधा नहीं होने दी जा रही है।
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डॉ. राकेश पंवार,चिकित्सा अधीक्षक,क्षेत्रीय अस्पताल, सोलन
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