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Solan News: औषधीय एवं वानिकी पौधों की खेती पर दिया जोर

Mon, 29 Sep 2025 11:16 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Sep 2025 11:16 PM IST
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Emphasis was given on cultivation of medicinal and forestry plants.
केवीके शिमला में आयोजित किया किसान मेला में प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए। स्रोत: ​नौणी विवि
केवीके शिमला में किसान मेले का आयोजन, 215 किसानों ने लिया भाग
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बागवानी विभाग, एचएफआरआई और स्वयं सहायता समूहों ने लगाई प्रदर्शनी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र शिमला में हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई), शिमला के सहयोग से किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में रोहड़ू के विधायक मोहन लाल बरागटा मुख्यातिथि रहे, जबकि पद्मश्री पुरस्कार विजेता नेक राम शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
मेले का उद्देश्य किसानों को औषधीय और वानिकी पौधों की खेती के महत्व के प्रति जागरूक करना था, जो पर्यावरण, स्वास्थ्य और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी हैं। शिमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 215 से अधिक किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया। निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंद्र देव ने विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों की जानकारी दी। किसानों को नियमित संपर्क बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
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मोहन लाल बरागटा ने कहा कि प्राकृतिक खेती अब विकल्प नहीं बल्कि समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती की उपज को उचित मूल्य प्रदान कर रही है ताकि किसान बड़े स्तर पर इसे अपना सकें। एचएफआरआई के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने औषधीय पौधों के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को औषधीय पौधों की खेती से फसल विविधीकरण अपनाने और समृद्ध वन संपदा के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि यह भविष्य है, और बेहतर मुनाफा कमाने के लिए किसानों को वर्तमान में ही इसकी खेती शुरू करनी चाहिए।
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जलवायु अनुकूल और प्राकृतिक खेती पर जोर
नौणी विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. संजीव चौहान ने किसान-वैज्ञानिक सहयोग और जलवायु अनुकूल खेती की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के पास जाकर समय-समय पर उनकी समस्याओं का समाधान करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कई बगीचों में पत्ती संबंधित बीमारियां आई, लेकिन जिन किसानों ने विश्वविद्यालय की सिफारिशों का पालन किया था, उनके बगीचों में पत्ते स्वस्थ रहे। डॉ. अश्विनी कटवाल ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की।

विभाग और स्वयं सहायता समूहों ने लगाई प्रदर्शनी
मेले में बागवानी विभाग, एचएफआरआई और स्वयं सहायता समूहों की ओर से प्रदर्शनियां लगाई गईं। इस अवसर पर रोहड़ू एफएसी अध्यक्ष सोहन लाल चौहान सहित केवीके शिमला के वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।
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