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तीन दिन उद्योग बंद रखकर करेंगे गत्ता उत्पादक प्रदर्शन
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बददी में एचपीसीबीएमए उद्योग संघ की बैठक में भाग लेते हुए पदाधिकारी। संवाद
- फोटो : SOLAN
बद्दी(सोलन)। गत्ते के कच्चे माल में 70 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने के कारण उत्तर भारत के पैकेजिंग उद्योग दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को उत्तर भारत के प्रांतों की एक बैठक बद्दी के किशनपुरा में हुई।
बैठक की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश गत्ता उद्योग संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने की। बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पेपर मिलों के मनमाने निर्णयों के विरोध में और आगे पैकेजिंग डिब्बे खरीदने वाली कंपनियों की ओर से सहयोग न दिए जाने के कारण प्रदेश के तमाम पैकिंग उद्योग सोमवार से लेकर बुधवार तक बंद रहेंगे।
राज्य प्रधान सुरेंद्र जैन, महामंत्री विशाल गोयल, उपाध्यक्ष राजीव गुलाटी, आदित्य पाल सूद, रजत गुप्ता, वित्त सचिव संजीव जैन और सह सचिव रमन अग्रवाल ने कहा कि पेपर मिलों की मिलीभगत के कारण पेपर की कीमतों में तेजी आ चुकी है। पहले से बैंकों के ऋण से दबे संचालकों के सामने अब तालाबंदी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि देश की मोदी सरकार भी कोई ध्यान नहीं दे रही। गत्ता संचालक हिमाचलियों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। केंद्र सरकार ने अगर हमें विशेषकर हिमाचल और उत्तर भारत के गत्ता उद्योगों को बचाना है तो तुरंत पेपर का एक्सपोर्ट बंद किया जाए, वरना पैकेजिंग उद्योग बंद हो जाएंगे। जब देश में ही पेपर की आपूर्ति स्थानीय उद्योगों के लिए पूरी नहीं हो रही तो इसका निर्यात करना बेमानी है। केंद्र सरकार निर्यात पर तुरंत एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाए, जिससे विदेशों को माल न जा सके। इस सम्मेलन में पंकज गुप्ता, आरके गर्ग पंजाब, दीपक कुमार पंजाब, सुशील सिंगला, विकास सिंगला, विशाल सिंगला, निर्मल सिंगला, नवीन वत्स, शमशेर शर्मा, अजय जैन, सतीश सैणी, प्रमोद शर्मा परवाणू, मनोज जैन, मनोज बिंदल, एमएल पटियाना सहित दर्जनों उद्यमी उपस्थित थे।
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चार माह में 70 फीसदी बढ़ोतरी
बीबीएन पैकेजर्स एसोसिएशन के सलाहकार निर्मल सिंगला, अध्यक्ष हेमराज चौधरी और महामंत्री अशोक राणा ने कहा कि अब पानी सिर के ऊपर से निकल चुका है। चार माह में पेपर के दामों में 70 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन गत्ता संचालकों को उनके उत्पाद का बढ़ा हुआ रेट नहीं मिल रहा है।
इनसेट
केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी
बैठक में आए तमाम प्रांतों हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के पैकेजर्स ने कहा कि केंद्र सरकार पेपर मिलों की मनमानी और धक्केशाही पर लगाम लगा पाने में नाकाम रही है, जिसके चलते उद्योग बंद हो रहे हैं। इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, वहीं हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
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बैठक की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश गत्ता उद्योग संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने की। बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पेपर मिलों के मनमाने निर्णयों के विरोध में और आगे पैकेजिंग डिब्बे खरीदने वाली कंपनियों की ओर से सहयोग न दिए जाने के कारण प्रदेश के तमाम पैकिंग उद्योग सोमवार से लेकर बुधवार तक बंद रहेंगे।
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राज्य प्रधान सुरेंद्र जैन, महामंत्री विशाल गोयल, उपाध्यक्ष राजीव गुलाटी, आदित्य पाल सूद, रजत गुप्ता, वित्त सचिव संजीव जैन और सह सचिव रमन अग्रवाल ने कहा कि पेपर मिलों की मिलीभगत के कारण पेपर की कीमतों में तेजी आ चुकी है। पहले से बैंकों के ऋण से दबे संचालकों के सामने अब तालाबंदी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि देश की मोदी सरकार भी कोई ध्यान नहीं दे रही। गत्ता संचालक हिमाचलियों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। केंद्र सरकार ने अगर हमें विशेषकर हिमाचल और उत्तर भारत के गत्ता उद्योगों को बचाना है तो तुरंत पेपर का एक्सपोर्ट बंद किया जाए, वरना पैकेजिंग उद्योग बंद हो जाएंगे। जब देश में ही पेपर की आपूर्ति स्थानीय उद्योगों के लिए पूरी नहीं हो रही तो इसका निर्यात करना बेमानी है। केंद्र सरकार निर्यात पर तुरंत एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाए, जिससे विदेशों को माल न जा सके। इस सम्मेलन में पंकज गुप्ता, आरके गर्ग पंजाब, दीपक कुमार पंजाब, सुशील सिंगला, विकास सिंगला, विशाल सिंगला, निर्मल सिंगला, नवीन वत्स, शमशेर शर्मा, अजय जैन, सतीश सैणी, प्रमोद शर्मा परवाणू, मनोज जैन, मनोज बिंदल, एमएल पटियाना सहित दर्जनों उद्यमी उपस्थित थे।
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चार माह में 70 फीसदी बढ़ोतरी
बीबीएन पैकेजर्स एसोसिएशन के सलाहकार निर्मल सिंगला, अध्यक्ष हेमराज चौधरी और महामंत्री अशोक राणा ने कहा कि अब पानी सिर के ऊपर से निकल चुका है। चार माह में पेपर के दामों में 70 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन गत्ता संचालकों को उनके उत्पाद का बढ़ा हुआ रेट नहीं मिल रहा है।
इनसेट
केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी
बैठक में आए तमाम प्रांतों हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के पैकेजर्स ने कहा कि केंद्र सरकार पेपर मिलों की मनमानी और धक्केशाही पर लगाम लगा पाने में नाकाम रही है, जिसके चलते उद्योग बंद हो रहे हैं। इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, वहीं हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।