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गुरु कृपा से हरि नाम की सौगात होती है प्राप्त : ऊषा
Sun, 01 Sep 2024 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 01 Sep 2024 11:27 PM IST
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दाड़लाघाट में संत निरंकारी भवन में सत्संग के दौरान मौजूद अनुयायी। संवाद
दाड़लाघाट में संत निरंकारी भवन में हुआ सत्संग
भक्ति की दी जानकारी, सच्चाई के मार्ग को करें प्राप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। संत निरंकारी भवन दाड़लाघाट में हुए सत्संग में गुरु कृपा के बारे में अनुयायियों को बताया गया। विचार ज्ञान प्रचारक बहन ऊषा कालिया ने कहा कि गुरु की कृपा से ही हरि के नाम की सौगात प्राप्त होती है। यह तभी संभव है जब गुरु निहाल हो। जिस के पास नाम रूपी धन होता है, उसके पास किसी तरह की कमी नहीं होती और वह सच्चे शाह होते हैं।
इन्हें सतगुरु की कृपा से निराकार (प्रभु) की जानकारी हो जाती है। फिर वह नाम रूपी मालामाल हो जाते हैं। तभी उन्हें सच्चे शाह भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रभु की प्राप्ति के लिए पूर्ण सतगुरु के चरणों में नतमस्तक होना पड़ेगा, जो अपने आप को झुका कर नतमस्तक हो जाते हैं, तब जाकर उन्हें परम पिता परमेश्वर की जानकारी होती है। प्रभु की जानकारी मानुष योनि में रह कर ही की जा सकती है। समय रहते राम को जान लिया वह बधाई के पात्र हैं और जिन्होंने अभी परमात्मा को नहीं जाना वह अपने आप को समर्पित करके गुरु चरणों में आ जाएं। इस मौके पर ज्ञान प्रचारक व पूर्व संयोजक शंकर दास गुप्ता, मुखी अर्की गरीब दास, दाड़ला ब्रांच के मुखी विद्या सागर ठाकुर सहित अन्य शामिल रहे।
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भक्ति की दी जानकारी, सच्चाई के मार्ग को करें प्राप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। संत निरंकारी भवन दाड़लाघाट में हुए सत्संग में गुरु कृपा के बारे में अनुयायियों को बताया गया। विचार ज्ञान प्रचारक बहन ऊषा कालिया ने कहा कि गुरु की कृपा से ही हरि के नाम की सौगात प्राप्त होती है। यह तभी संभव है जब गुरु निहाल हो। जिस के पास नाम रूपी धन होता है, उसके पास किसी तरह की कमी नहीं होती और वह सच्चे शाह होते हैं।
इन्हें सतगुरु की कृपा से निराकार (प्रभु) की जानकारी हो जाती है। फिर वह नाम रूपी मालामाल हो जाते हैं। तभी उन्हें सच्चे शाह भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रभु की प्राप्ति के लिए पूर्ण सतगुरु के चरणों में नतमस्तक होना पड़ेगा, जो अपने आप को झुका कर नतमस्तक हो जाते हैं, तब जाकर उन्हें परम पिता परमेश्वर की जानकारी होती है। प्रभु की जानकारी मानुष योनि में रह कर ही की जा सकती है। समय रहते राम को जान लिया वह बधाई के पात्र हैं और जिन्होंने अभी परमात्मा को नहीं जाना वह अपने आप को समर्पित करके गुरु चरणों में आ जाएं। इस मौके पर ज्ञान प्रचारक व पूर्व संयोजक शंकर दास गुप्ता, मुखी अर्की गरीब दास, दाड़ला ब्रांच के मुखी विद्या सागर ठाकुर सहित अन्य शामिल रहे।
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